थॉमस माइजेनहाइमर
आप कौन हैं स्वामीजी और मैं कौन हूँ? सच में मेरे पास इसका कोई उत्तर नहीं है I मेरे लिए आप न तो कोई गुरू हैं और ना ही मालिक I आपमें एक प्राकृतिक एवं स्वत: स्फूर्त बालसुलभ प्रेम प्रतिबिम्बित होता है I आपके साथ हुए समागम में - यह पारस्परिक प्रतिबिम्ब - मैंने पुन: अपने हृदय में प्रेम को प्राप्त कर लिया है I और प्रेम की वहीं से शुरूआत होती है जहाँ चिन्तन समाप्त होता है I प्रेम व्यक्तिगत मत से मुक्त होता है, शक्ति के दावे से मुक्त होता है, निर्भरता से मुक्त होता है I
यही वह प्रेम है जो आपके परिवार में, बच्चों के प्रति उनके प्रेम में और उनके समस्त धर्मार्थ कार्यों में प्रज्वलित होता है I प्रेम समस्त आध्यात्मिक पथों के विरुद्ध यथार्थ रूप से सहनशील है I यह प्रेम मुझे पुन: सादगी एवं लौकिक कर्तव्य की ओर वापस ले आया है I यह एक ऊर्जा है जो सभी अवधारणाओं से श्रेष्ठ है और इस समय अपने आपको प्रकट कर रही है I इस तरह से हम मित्र बन गए जो कि सभी कुछ आपस में बाँटते हैं I
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