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तन्त्र

Swami Ji

तंत्र क्या है?

तंत्र एक संस्कृत शब्द है जो दो शब्दों; ’ तं’ और ‘त्र’ से बना है| 'तं' तनोति शब्द का लघुरूप है, जिसका मतलब है खींचना; और 'त्र' 'त्रायती' शब्द का लघुरूप है, जिसका मतलब है 'मुक्ति'| ये दोनों शब्द तंत्र में जुडते हैं, और इस 'तंत्र' शब्द का मतलब है ‘अपनी चेतना को मुक्ति की ओर खींचना’.

तंत्र इस मुक्ति को पाने का तरीका है; मुक्ति, इस मायावी संसार से, जहाँ सिर्फ अहम् और सांसारिक चीज़ों से लगाव राज करते हैं. तंत्र आपको अहम् और सांसारिक चीज़ों के लगाव के घेराव से मुक्ति दिलाता है|

वैराग्य; मुक्ति का साधन

तंत्र के अनुसार वैराग्य मुक्ति का साधन है| वैराग्य का मतलब है, अनियमित, या बेशर्त प्रेम; अकारण प्रेम| आपके प्रेम करने का अगर कोई कारण है, या अगर उस प्रेम की कोई शर्ते या ज़रूरतें हैं, तो वो प्रेम, प्रेम नहीं, खाली एक खोखला लगाव है| किसी से बेशर्त एवं अप्रतिबंधित प्रेम के लिए आवश्यक है मन में दया, भावना, ओर मनोभाव का होना| वैराग्य का ये भी मतलब है की आप समझें की इस संसार में जितना धन है, हमें वो सब यहीं इस संसार में ही छोड़ कर जाना है; मरने पर हम कुछ भी साथ नहीं ले जायेंगे| सांसारिक चीज़ों का लगाव एवं अहम् हमें इस संसार से बांधे रखता है; तंत्र हमें इस बंधन से मुक्ति दिलाता है|

तंत्र एवं सम्भोग - पश्चिमी देशों में प्रचलित गलत धारणा

तंत्र के नाम पर पश्चिमी देशों के लोग सम्भोग एवं यौन-क्रिया अनुष्ठान के बारे में सोचने लगते हैं| यह एक आम मिथ्या या ग़लतफहमी है| पुराने संस्कृत तंत्र से जुडे वेदों में सम्भोग एवं यौन उर्जा का उल्लेख है और वो इसलिए की सम्भोग एवं यौन उर्जा, हमारी चेतना का एक महत्वपूर्ण भाग है| ये हमारे जीवन का एक महत्वपूर्ण भाग है और हम इसे अनदेखा नहीं कर सकते| लेकिन यहाँ कामुकता का मतलब सिर्फ कामाग्नि या वासना नहीं; यह कामुकता दिव्य है; यह योगी के लिए है, भोगी के लिए नहीं| तंत्र सृजन करता है प्रेम उर्जा; जिससे प्राप्त होती है मुक्ति| स्वामी बालेन्दु खेद प्रकट करते हैं उन लोगों के लिए जो तंत्र के नाम पर वासना से भरी यौन-क्रियाओं का व्यापार करते हैं| तंत्र विद्या हमे शारीरिक चक्र ज्ञान और कुण्डलिनी की सहायता से अपनी चेतना को जागरूक करना सिखाती है| स्वामी बालेन्दु कार्यशाला में इन्ही शारीरिक चक्रों के बारे में बताते हैं; तांत्रिक सम्भोग के बारे में नहीं| तंत्र प्रेम का प्रचार करता है, वासना का नहीं| शारीरिक सम्भोग, प्रेम का एक महत्वपूर्ण भाग है; उसे नकार नहीं सकते| तंत्र आत्मिक प्रेम है|

तंत्र और रंग - सफ़ेद तंत्र, लाल तंत्र, काला तंत्र

पश्चिमी देशों में एक और मिथ्या आम है; वह है तंत्र को रंग से जोडने की| जैसे की सफ़ेद तंत्र अच्छा तंत्र है, काला या लाल तंत्र खराब या यौन-क्रियाओं से भरा तंत्र है| तंत्र और इन सब रंगों का कोई सम्बन्ध नहीं है|

तंत्र और जादू - पूर्वी देशो में प्रचलित गलत धारणा

अगर भारत वर्ष में किसी आम इंसान को तंत्र के बारे में पूछा जाए तो वो सेक्स के बारे नहीं, जादू टोना के बारे में सोचते हैं| तंत्र का नाम जुड़ा है ऐसे बाबा और तांत्रिक लोगों से, जो मंत्र शक्ति और ताबीजों के ज़रिये आपकी मदद भी कर सकते हैं और आपको नुकसान भी पहुंचा सकते हैं| दुर्भाग्य से इस प्रकार की जाली या फर्जी चिकित्सा भारत के ग्रामीण इलाकों में बहुत प्रचलित है; जहाँ ये सब तांत्रिक बाबा लोग, आम जनता की आँखों में धुल झोंकते हुए घूमते रहते हैं| वो लोगों को ताबीज़, मंत्र, व यन्त्र देते हैं धन वृद्धि, या फिर स्वस्थ शारीर के लिए; सब एक दाम पर| ये सच्चा तंत्र नहीं है; और हमारी प्रार्थना है सब से, की ऐसी अनुष्ठानो से दूर रहे, इन सब पर विश्वास ना करें, और प्रेम की राह की खोज करें, अपनी आत्मिक सच्चाई को समझें और उस पर विश्वास करें, आत्म सम्मान से जियें और अपनी चेतना को मुक्ति की ओर खींचें|