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एक बच्चे का प्रायोजक बनना |
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श्री बिन्दु सेवा संस्थान 160 बच्चों की शिक्षा की जिम्मेदारी ले रहा है। उनके माता-पिता उन्हें शिक्षा नहीं दे सकते क्योंकि वे गरीबी रेखा के नीचे रह रहे हैंI इसलिये हमारे ट्रस्ट श्री बिन्दु सेवा संस्थान ने उनके उज्ज्वल भविष्य के लिये उन्हें शिक्षा प्रदान करने का निश्चय किया है। आब वे वृन्दावन के प्राथमिक विद्यालयों एवं आश्रम में स्वामी बालेन्दु ई.वी. बालविहार में शिक्षा प्राप्त कर रहे हैं। श्री बिन्दु सेवा संस्थान के जन प्रबन्धक यशेन्दु गोस्वामी का प्रत्येक बच्चे के माता के साथ बैठक होता था एवं वे पाते थे कि वे उन्हें धन के अभाव में शिक्षा देने में असमर्थ थे। प्राथमिक विद्यालय के प्रधानाचार्य स्वामी बालेन्दु जी के साथ बैठक के बाद "स्वामीजी" (ट्रस्ट के स्वामी) इन बच्चों के पुस्तकों, पोशाकों आदि सहित शिक्षा का खर्च उठाने के लिये तैयार हुए। आश्रम के बगल में स्वामी बालेन्दु ई.वी. बालविहार गरीब परिवार के छोटे बच्चों को शिक्षा की प्रथम सीढ़ी प्रदान कर रहा है। 3 से 13 वर्ष तक के 160 बच्चे यहाँ प्रफुल्लित ढ़ंग से सीखते हैं। उनका सुबह से दोपहर तक देखभाल किया जाता है एवं उन्हें गर्म भोजन मिलता है। एक साथ हम 160 बच्चों को प्रायोजित कर रहे हैं और हम आपका समर्थन चाहेंगेI हम आशा कर रहे हैं कि भविष्य में हम अधिक बच्चों को शिक्षा प्रदान कर सकते हैं क्योंकि वृन्दावन एवं नजदीक के गावों में अनेक बच्चे हैं जो धन के अभाव में कोई शिक्षा नहीं पा रहे हैंI आप भी उनकी मदद कर सकते हैंI यदि आप एक बच्चे को प्रायोजित करना चाहते हैं तो इसकी लागत प्रति वर्ष 140 यूरो होगीI प्रायोजन से आपको बच्चे की तस्वीर, प्रगति रिपोर्ट मिलेगी एवं यदि आप चाहें तो आप उनसे मिल भी सकते हैंI इस प्रकार का योगदान इन व्यक्तिगत बच्चों एवं उनके परिवारों का जीवन बदलने में एक बड़ी भूमिका निभा सकता हैI यह प्रत्येक बच्चे को उनके जीवन में एक रास्ता बनाने एवं अपने समुदाय के प्रति योगदान देने के लिये दक्षता प्रदान करता हैI हमने महसूस किया कि बहुसंख्यक लोग एक लड़्की की मद करने के लिये अधिक इच्छुक हैंI तथापि ये 160 बच्चे, लड़्के एवं लड़्कियाँ समान गरीब स्थिति में हैं और समान रूप से उनकी सहायता की जाती हैI आत्मा का कोई लिंग नहीं है; लड़्के एवं लड़्कियाँ ईश्वर के द्वारा समान रूप से प्रेम किये जाते हैंI इसलिये हम यह संभावना नहीं प्रदान करते हैं कि बच्चे का चुनाव उसके लिंग, चेहरे या नाम द्वारा होI लड़्के एवं लड़्कियों को किसी एक से कोई हानि नहीं होगी, प्रत्येक को सहायता मिलेगीI इसलिये कृपया अपना हृदय खोलें एवं ईश्वर के बच्चों को प्रेम एवं सहायता प्रदान करेंI यद्यपि श्री बिंदु सेवा संस्थान प्रत्येक बच्चे की सहायता करता है लेकिन आप अपने योगदान से हमारा कार्य मे सहायता कर सकते है। आप किसी एक तथा कुछ बच्चों के प्रायोजक बन सकते है। प्रायोजकता के दौरान आप को ब्च्चे कि एक फोटो, रिजल्ट कार्ड (प्रगति पुस्तिका) तथा यदि आप भारत आते है तो आप उस बच्चे से भी मिल सकते है। इस योगदान से लम्बे समय के लिये इन प्रत्येक बच्चों का तथा उनके परिवार का जीवन बदल जायेगा, प्रत्येक बच्चों को ज्ञान दिजिए ताकी वह अपना रास्ता जीवन में स्वयं बना सके तथा उनके संचार में सहयोग किजिए। हम आशा करते है की हम भविष्य में अधिक से अधिक बच्चे साक्षरता सहित प्रदान करें क्योंकि यहाँ वृन्दावन में तथा आस पास के गाँव में बहुत से गरीब बच्चे हैं जो की धन के अभाव के कारण शिक्षा ग्रहण नही कर पाते हैं।
भारत में स्कुल जाना इतना जरूरी नही माना जाता है, इसने एक अवस्था खडी कर दी जिससे हमने पश्चिमी स्कुलों से एक अलग तरह का स्कुल चलाया, यहा हम माता-पिता को समझाते हैं की यह आपके लिये अच्छा होगा यदि आप अपने बच्चों को स्कुल भेजेंगे, बहुत से माता-पिता ने समझा और खुश हुए कि हमारा बच्चा हमारे स्कुल आ सकता है तथा कुछ लोग वास्तव में नही समझे लेकिन उन्होने सोचा कि स्कुल जाना हमारे बच्चों के लिये लाभप्रद होगा, उन्हे कुछ नया पहनने को मिलेगा, कुछ नई चीजे मिलेंगी, कुछ गरम खाना दोपहर के भोजन में खाने को मिलेगा। हम बड़े खुश होते जब बच्चे स्कुल पढने आते हैं, चाहे उनके माता-पिता के लिये शिक्षा की उपस्थिति महत्व रखती है या नही, लेकिन अभाग्यतावश हमने प्रायः अनुभव किया की मता-पिता स्कुल को समय का व्यर्थ उपयोग मानते हैं, वे कभी स्कुल नही गये अतः वे इसे इतना जरूरी नही मानते हैं, अभाग्यतावश कुछ माता-पिता सोचते हैं की जब वे स्कुल में रहेगे वे अच्छी तरह अपना कार्य कर सकते है तथा पैसे कमा सकते हैं। यह वास्तव में बडे ही दुखः कि बात है की बहुत से बच्चे खेतों में, दुकानों में, फेक्ट्रियों में काम करते हैं तथा 10 युरो से भी कम प्रति माह कमाते हैं, बाल्यकाल काम करने कि बजाय खेलकर तथा मस्ती से स्कुल में व्यतित होना चाहिये इसलिये हम जाते है तथा माता-पिता से बात करते है, तथा समझाते है कि स्कुल जाना उनके बच्चो के लिये कितना लाभप्रद है हमेशा हम उन्हे उनके बच्चों को स्कुल भेजने के लिये समझाने मे सक्षम हो जाते है। कभी ऐसा भी हो जाता है की दो महिने बाद यह सब हो जाने के बाद वे सोचते है की यह सब कुछ नही है तथा वे किसी भी तरह से अपने बच्चों को स्कुल जाने के लिये नही भेजते है, जब वे बच्चे बिना किसी वजह कुछ दिन नही आते हैं तो हमें दुबारा उन माता-पिता से बात करने कि जरूरत पड़ती हैं, हम उनके घर जाते हैं तथा कभी हमे यह उत्तर मिलता है कि वह इस समय काम पर हैं। हम इस परिस्थिति के लिये क्षमा चाहते हैं तथा हम माता-पिता को समझाने की अपनी पूरी कोशिश करते हैं, परन्तु वे अपनी बात पर ड़टे रहते है तथा हमें वह बात ग्रहण करनी पड़ती है, हम किसी को इतना जोर नही दे सकते हैं, इस तरह जो बच्चा हमारी प्रायोजकता कि सुची में होता है तथा कुछ दिन बाद वह किसी भी तरह से नही आता है। हम आशा करते हैं की हमारे प्रायोजक भी हमारी इस समस्या को समझ सकते हैं यदि वह बच्चा जिसे वे प्रायोजित कर रहे थे वह स्कुल छोड़ चुका है, इस परिस्थिति में जैसे सम्भव हो वह किसी दुसरे बच्चे को प्रायोजित कर सकते हैं तथा उसका भविष्य प्रकाशमय बना सकते हैं। आप भी इनकी सहायता कर सकते हैं, प्रति वर्ष 140 युरो देकर आप किसी एक बच्चे को प्रायोजित कर सकते है तथा इस प्रकार उनके भविष्य के लिये सहयोग कर सकते हैं। "बच्चे इस दुनिया के भविष्य हैं" बच्चों कि प्रायोजकता के लिये यहाँ क्लिक किजिए
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