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ध्वनि चिकित्सा

sound therapy with the rudraveena

सामंजस्य एवं गहन विश्राम के लिये ध्वनि चिकित्सा

ध्वनि चिकित्सा की उत्पत्ति ध्वनि के योग, नाद-योग के साथ-साथ योग के गहन विश्राम, योग-निद्रा से मानी जाती हैचिरकाल से तारयुक्त भारतीय यंत्रों की ध्वनियों का प्रयोग उपचार एवं सामंजस्य के लिये किया जाता रहा है

प्राचीन कालों में लोगों ने तारयुक्त यंत्रों का प्रयोग धार्मिक संगीतों को बजाने के लिये एवं पूजा (अनुष्ठानों) के संगत तथा सहायता, चिंतनों और योगासनों के लिये भी किया है और आज भी भारत में संगीतकारों को अब भी अनुष्ठानों, उपचारों एवं योग-निद्रा में वादन के लिये आमंत्रित किया जता है हमारे समाज के संचार-माध्यम के विकास के क्रम में, सी.डी. ने जीवंत संगीत का स्थान ले लिया है लेकिन भारतीय संगीत सदा हर पल नूतन होकर उभरता है और यह एक हृदय से दूसरे हृदय में प्रेषण है

ध्वनि चिकित्सा का प्रभाव

ध्वनि चिकित्सा तनावों एवं दवाबों के द्वारा उत्पन्न अवरोधों से आराम प्रदान करता है शांतिपूर्ण मन की गहन अवस्था में पहुँचना स्वत: उपचार करनेवाली शक्तियों को पुन: स्फुर्तियुक्त एवं प्रत्यावर्तित करता है

ध्वनि एक नर्म मालिश प्रदान करता है जो कमोवेश आंतरिक शरीर में गहन रूप से प्रवेश करता है भारतीय संगीत परम्परा के चुनिन्दा स्वर सुर (राग) मन की समस्वर अवस्था की पुन:प्राप्ति में मदद करता है आरंभ में तनाव मुक्ति के व्यायामों के प्रयोग से श्रोता पोषक एवं उपचारात्मक स्वरों के लिये मार्ग प्रशस्त करता है संगीत एक विस्तृत आत्मबोधन की ओर अग्रसर करता है यह आंतरिक अनुभव को सक्रिय करता है एवं किसी के अपने आंतरिक संसाधनों तक नयी अभिगम्यता का पता लगाने में मदद करता है शरीर के सभी अंगों एवं इन्द्रियों को शांति तक पहुँचने में शायद ही निद्रा मिले इस गहन विश्राम के लिये वास्तविक जीवन्त संगीत का अनुभव अत्यंत महत्वपूर्ण है क्योंकि संगीतकार एवं श्रोता के बीच सच्चा संवाद सिर्फ इस ढ़ंग से आरंभ हो सकता है जब संगीतकार श्रोता के तात्कालिक अनुभव के अनुरूप संवेदनशीलता हो

रूद्र वीणा

Rudra Veena

बीन या रूद्र वीणा एक सितार जैसा वाद्य है एवं भारत के प्राचीनतम शास्त्रीय वाद्य-यंत्रों से संबंधित है पारंपरिक कहावतों के अनुसार जब शिव ने अपनी पत्नी पार्वती की सुन्दरता का ध्यान किया तो उन्होंने इसकी रचना की रूद्र वीणा लोकप्रिय सितार का एक आरम्भिक रूप है एवं इसे भारतीय तारयुक्त वाद्य-यंत्रों की जननी तथा रानी कहा जाता है मंद्र एवं अधिस्वर से समृद्ध रूद्र वीणा सदियों से मन की चिंतनशील अवस्था को जगाने के लिये एक आदर्श संगीत वाद्य-यंत्र रहा है इसकी ध्वनि आवृत्तियों के कारण अवरोधों को प्रभावशाली रूप से एक पूर्णतया सरल विधि से दूर करना संभव है

 

Sound massage with the sound massage table

  Soundmassage on the sound table

The sound massage table is a body monochord with 47 strings, tuned on three octaves. The vibration is transferred onto the whole body and you can thus receive a complete massage and a deep relaxation.

 

जीवन संबंधी टिप्पणियाँ

स्वतन्त्र संगीतकार थॉमस मीजेन्हाइमर का जन्म 1966 में हुआ एवं वे वीजबैडन/जर्मनी के एक विशेष विद्यलय में संगीत चिकित्सक के रूप में काम करते हैं
1991 में उन्होंने सितार का अपना अध्ययन शुरू किया एवं प्रोफेसर त्रिभुवन नाथ नागर (वाराणसी/भारत) के मार्गदर्शन में भारातीय संगीत चिकित्सा में प्रशिक्षुता छोड़ दिया
1999 से वे ध्रुपद के प्राचीन शास्त्रीय संगीत का अध्ययन करते आ रहे हैं एवं पंडित असीत कुमार बनर्जी के मार्गदर्शन में रूद्र वीणा बजान सीख रहे हैं
2005 से वे स्वमीजी के संपर्क में हैं जिन्होंने उन्हें उनके कार्य में बहुत सहयोग दिया

" मेरे लिये संगीत प्रेम की एक भाषा है यह मेरा दैनिक भोजन, मेरी प्रार्थना, जीविका के स्रोत से मेरा संबंध है जब मैने प्रथम बार एक भारतीय सितार सुना, मेरी आँखों में आँसू आ गये और मैं गहरे रूप से प्रभावित हुआ मानो कोई मेरे सच्चे रूप का आह्वान कर रहा है
भारतीय संगीत मेरे लिये अनोखा या आकर्षक नहीं है; यह आत्मिक सत्य को अनुभव करने की एक संभावना है
स्वामीजी ने मुझे अपने अनुभव को दूसरों के साथ बाँटने के लिये उत्साहित किय़ा इसलिये मैं उनकी धर्मार्थ योजनाओं की अपनी ध्वनि चिकित्सा के माध्यम से सहायता करना चाहता हूँ"

थॉमस मेइजेनहाइमर

चिंतनशील संगोष्ठियों या व्यक्तिगत ध्वनि चिकित्सा के बारे में पूछताछ करें: thomas@jaisiyaram.com