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प्रेम ध्यान

Yashendu

प्रेम ध्यान

प्रेम ध्यान एक आध्यात्मिक मार्ग, एक आसान अभ्यास है जो आपको अपने आप में सर्वव्यापी प्रेम, प्रेम जिसे हमारे स्वकेन्द्रित, भौतिकवादी महत्वाकांक्षाओं के अधीन दबाया, कुचला और गला घोंटा जा चुका है,  को प्रज्ज्वलित करने के लिये मार्गदर्शित करता है

प्रेम: प्यार

प्रेम शब्द का साहित्यिक अनुवाद प्यार, एक शिशु का अपनी माता के प्रति सद्‌गुणी विश्वास की भावना एवं माता का अपने शिशु के प्रति नि:स्वार्थ तथा स्नेहपूर्ण पारस्परिक प्रेम, है ईश्वर के उपहार, बिना शर्त इस प्रेम को पुनर्जीवित करने की आवश्यकता है ताकि सच्ची स्वतंत्रता को बंधनमुक्त किया जा सके लेकिन हम इसे कैसे करते हैं? यह ध्यान के एक साधारण अभ्यास के द्वारा प्राप्त किया जाता है

ध्यान

संस्कृत शब्द ध्यान्‌ या ’चिन्तन’ ध्यान के लिये सही शब्द है हाँ, ’चिन्तन’ या सोचने की क्षमता ने हमारे लिये अनेक वैज्ञानिक आश्चर्य और साथ में मानव जाति की विनाश के अनेक कारक एवं अनगिनत कष्ट भी उत्पन्न किया है यदि चिन्तन एवं ध्यान की शक्ति ऐसी है तो हम प्रेम के बारे में सोचें, प्रेम का ध्यान करें हम प्रेम ध्यान का आचरण करें और कल्पना करें कि प्रेम की शक्ति आपको प्राप्त हो श्री यशेन्दु कहते हैं कि केवल प्रेम ही एक ऐसी शक्ति है जो आपकी सभी समस्याओं को बहा ले जाती है चूँकि प्रेम सर्वोच्च है उन्होंने प्रेम पर अनुसन्धान, चिन्तन एवं ध्यान किया ताकि एक सामान्य अभ्यास का विकास किया जा सके जो आपके द्वारा भूल से आपके चारों तरफ तैयार की गयी दीवारों को गिरा देगा एवं एक पूर्ण जीवन, प्रेममय जीवन, एक सृजनात्मक जीवन, आपके द्वारा सदा से इच्छित जीवन जीने के लिये आपके हृदय को खोल देगा

प्रेम ध्यान, एक जागरण, एक जीवन शैली

श्री यशेन्दु गोस्वामी इस अभ्यास का आचरण संस्कृत मन्त्रों के उच्चारण एवं आपके हृदय को सभी प्रतिकूल विचारों से शुद्ध करने वाले आध्यात्मिक व्याख्यानों के साथ करते हैं यह शुद्ध हृदय अब प्रेम की शक्ति को प्राप्त कर सकता है ध्यान का यह अभ्यास क्रमश: आपको अपने, प्रेम के अधिक नजदीक लाता है और आपके जीवन में एक सार्थकता लाता है

प्रेम ध्यान प्रेम का एक कदम है हाँ, आपको वह कदम प्रेम के जीवन में ले जानए का निर्णय करना है यह आपके जीवन में एक सौन्दर्य, एक अलंकरण, एक प्रेम रंग लायेगा जो आपको सभी प्रतिकूल ऊर्जाओं, विचारों एवं भावनाओं को त्याग देने के लिये तैयार करेगा चूँकि सर्वव्यापी प्रेम, मानव जति के अस्तित्व में रहने का कारण, आपके हृदय में स्थापित हो रहा है प्रेम का धर्म, हाँ, मानव जाति का केवल एक धर्म है और वह है प्रेम का धर्म दुनिया के सभी धर्म आपको प्रेम करना सिखाते हैं यह आपको सर्वधर्म अपनाने की शिक्षा देगा   

प्रेम का धीमा जागरण आपमें एक प्रेममय वातावरण उत्पन्न करेगा एवं आपको अपनी सभी चिन्ताओं को प्रेम के द्वारा दूर करने, हाँ प्रेम के द्वारा समाप्त करने की शक्ति देगा चूँकि आप इस ध्यान का अभ्यास जारी रखते हैं, आप एक जागरण, एक नयी जीवन शैली, एक प्रेममय जीवन एवं प्रेम के एक आध्यात्मिक मार्ग का अनुभव करेंगे  

आने वाले प्रेम ध्यान कि तिथि कि जानकारी के लिए हमारा कलेण्ड़र देखिए