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यदि लोग चक्रों के एक अधिक विस्तृत व्याख्या में अभिरूचि लेते हैं, तो एक चक्र कार्यशाला आयोजित की जा सकती है। इसमें स्वामीजी अपने चक्रों के साथ कार्य करने तथा स्वयं अवरोधों को समाप्त करने के संबंध में विधियाँ तथा तकनीक बताते हैं। चक्र कार्यशाला आधा दिन, पूरे दिन भर या एक सप्ताहांत तक चल सकती है। इस कार्यशाला को करने के किये स्वामीजी को कम से कम 20 प्रतिभागियों की जरूरत होती है।
आयुर्वेदिक पाक कार्यशालाओं में आप एक स्वास्थ्यकर ढ़ंग से शाकाहारी भोजन पकाना सीख सकते हैंI इसके बाद स्वादिष्ट भोजन एक-साथ खाया जायेगा। इसमें लगभग 4 घंटे लगते हैं।
दो या चार घंटे के कार्यशालाओं का आयोजन विभिन्न विषयों जैसे कि योग एवं तनाव, पीठ का दर्द, स्त्रियों के स्वास्थ्य, वजन की कमी के लिये हो सकता है......यशेन्दु गोस्वामी प्रतिभागियों का आसनों के द्वारा मर्गदर्शन कर सकते हैं।
यदि आप एक अस्पताल का भ्रमण आयोजित करना चाहते हैं तो स्वामीजी वैसे लोगों को अस्पतालों में भी अपनी उपचारात्मक ऊर्जा के द्वारा सहायता प्रदान कर प्रसन्न होंगे। जिन्हें इसकी सर्वाधिक जरूरत है उन्हें वे अपना प्रेम देने के लिये इसे नि:शुल्क करेंगे।
बच्चे, किशोर या किशोरी एवं युवा वयस्क स्वामीजी के लिये बहुत महत्वपूर्ण हैं। वे विद्यालय या विश्वविद्यालय में व्याख्यान देकर युवा लोगों की उनके विकास में मदद करना पसंद करेंगे। यशेन्दु गोस्वामी वहाँ योग कार्यशालाएँ आयोजित करने में अपना योगदान देकर प्रसन्न होंगे। युवा लोगों की मदद कर आप ईश्वर की सेवा कर सकते हैं। स्वामीजी एवं यशेन्दु गोस्वामी इसे उनके लिये एक उपहार के रूप में करते हैं क्योंकि वे इस जगत के भविष्य हैं।
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स्वामीजी यशेन्दु एवं रमोना के साथ भ्रमण कर रहे हैं। उन्हें दो कमरे की जगह चाहिये एवं वे एक घर में न कि होटल में रह कर प्रसन्न होंगे क्योंकि व्यक्तिगत संपर्क महत्वपूर्ण एवं मूल्यवान है।
वे भारतीय व्यंजन पकाना एवं खाना पसंद करते हैं इसलिये वे
आपके साथ मिलकर पका कर एवं खाकर प्रसन्न होंगे।
व्यक्तिगत उपचार सत्रों के लिये मालिश तालिका आवश्यक है।
उसी कमरे में एक सी डी प्लेयर भी होना चाहिये।
कमरे के आकार पर निर्भर करते हुये दर्शन, चिंतन एवं
कार्यशालाओं के लिये एक माइक्रोफोन की जरूरत हो सकती है।
चक्र नृत्य पार्टी के लिये उन्हें एक संगीत यंत्र एवं एक
माइक्रोफोन की जरूरत है।
निश्चित रूप से आपके क्षेत्र में ढ़ेर सारे लोग हैं जिनकी स्वामीजी के कार्यक्रम में अभिरूचि है। इसलिये जब वे आते हैं तो य्न्हें यह समझना चाहिये कि उनके भाग लेने की संभावना है। यदि आपका स्वयं का केन्द्र है तो आप अवश्य सारी सूचना भेज सकते हैं कि क्या, कब एवं कहाँ आपसे संपर्क करना है? आप योग केन्द्रों एवं अन्य आध्यात्मिक केन्द्रों से संपर्क कर सकते हैं।
प्राय: वे स्वामीजी के व्याख्यान या यशेन्दु की योग
कार्यशालाएँ आयोजित करने में रूचि लेते हैं।
आप जैव-दूकानों, केन्द्रों, एवं अस्पतालों में पूछ सकते हैं कि क्या आप वहाँ प्रचार-पर्चियाँ लगा सकते हैं?
स्थानीय संचार-माध्यमों को सूचित किया जा सकता है। कुछ सकारात्मक बातों के संबंध में रिपोर्ट कर पत्रकार प्राय: प्रसन्न होते हैं। स्वामीजी भी एक रेडियो या दूरदर्शन साक्षात्कार देकर प्रसन्न होंगे।
छोटे समाचार पत्रों के लेख भी बहुत सारी रूचि एवं ध्यान
उत्पन्न करते हैं।
यदि आपको विज्ञापन के लिये विषय-वस्तु की जरूरत हो तो आप
उसे हमारे वेबसाइट से लेकर डाउनलोड कर सकते हैं।
स्वामीजी भारत में गरीब बच्चों की सहायता करने के लिये कार्य करते हैं ताकि उन्हें भविष्य में एक अवसर मिले। उपचार एवं चिंतन से प्राप्त धन का प्रयोग केवल बच्चों के धर्मार्थ परियोजनाओम के लिये किया जायेगा। स्वामीजी का विचार है कि इस धन को दूसरे तरीके से खर्च करना हितकर नहीं होगा। इस धन से वे एक शतांश भी रहने या भोजन करने के लिये खर्च नहीं करते हैं। उनका व्यक्तिगत खर्च योग कार्यशालाओं, चक्र कार्यशालाओं एवं व्याख्यानों से आनेवाले धन से पूरा होता है। इस धन से आयोजकों को भी विज्ञापन या किराये का खर्च पूरा करने के लिये 25% हिस्सा मिलता है।
स्वामीजी का आगमन आपके लिये एक आशीर्वाद होगा। आप अपने घर एवं भारत दोनों में इतने सारे लोगों की मदद कर रहे हैं। आपके स्थान पर स्वामीजी के आगमन की घोषणा हमारे वेबसाइट पर की जायेगी जिसमें आपको हमारा आयोजक घोषित किया जायेगा ताकि इस क्षेत्र में अभिरूचि रखने वाले अनेक लोग आपके केन्द्र या आपके द्वारा कार्यक्रम के लिये चुने गये स्थान पर आ सकें। आपको कई दिल्चस्पी लेने वाले तथा दिल्चस्प लोगों से मिलने का अवसर मिलेगा।
अपने बारे में कुछ सूचना देने के लिये जो हमें आपके स्थान पर कार्यक्रम तैयार करने में मदद करेगा कृपया यहाँ क्लिक करें।