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खजुराहो |
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खजुराहो मंदिर स्थल न केवल विदेशी पर्यटकों के लिये बल्कि उन भारतीय पर्यटकों के लिये भी प्रसिद्ध है जो इस विश्व विरासत स्थल की अद्भुत कलाकृति की प्रशंसा करने आते हैं। इसकी मूर्तिकला एवं स्थापत्यकला पर्यटकों का ध्यान आकृष्ट करती है। इन मंदिरों का निर्माण एक हजार वर्ष ईसा पूर्व के आस-पास चंदेल वंश के द्वारा किया गया। 85 निर्मित मंदिरों में से केवल 20 खड़े बचे हैं। इन्हें तीन मुख्य समूहों में बाँटा जा सकता है, पश्चिमी, पूर्वी एवं दक्षिणी। स्थापत्यकला की दृष्टि से ये सब मंदिर अद्वितीय हैं। कमोत्तेजक उद्देश्यों के विस्तृत मूर्तिकला संबंधी वर्णन के कारण मंदिरों को कामसुत्र मंदिर भी कहा जाता है। तथापि कामुकता ही एक मात्र विषय नहीं है। भारत के धार्मिक कला के प्रति इसके महत्वपूर्ण योगदान के लिये खजुराहो को उचित सत्कार नहीं मिला है - वस्तुत: मंदिर की भीतरी एवं बाहरी दीवारों पर सैकड़ों उत्कृष्ट प्रतिमाएँ हैं जो हिन्दू धर्म की चित्रात्मक समृद्धि को दर्शाती हैं। इस भव्य स्थल का भ्रमण करना एक असाधारण अनुभव है। खजुरहो कि तस्वीरों को देखने के लिए यहाँ क्लिक करें
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