Language:
English
German
French
Spenish
Italian
Russian
Russian
Italian
Spenish
French
German
English
इस पृष्ठ को अन्य भाषाओँ में पढ़ें:

संस्थापक

Sri Bindu Ji

सन्त गोस्वामी श्री बिन्दु जी महाराज

गोस्वामी श्री बिन्दु जी महाराज का जन्म राधाष्ट्मी (देवी राधा का जन्मदिन) के शुभ दिवस को 1893 ईसवी में अयोध्या की पावन नगरी में हुआ गोस्वामी श्री बिन्दु जी महाराज की शिक्षा एवं धार्मिक दीक्षा अयोध्या में हुई गोस्वामी बिन्दु जी महाराज ने रामायण, भागवत, भागवत गीता एवं अन्य शास्त्रों तथा पुराणों का अध्ययन किया श्री राम चरित मानस उनका प्रिय विषय था वे संस्कृत, हिन्दी, अंग्रेजी, उर्दू, ब्रज भाषा, अवधी, भोजपुरी एवं अन्य भाषाओं के विद्वान थेI वे एक महान वक्ता, विद्वान, लेखक, संगीतकार एवं कवि थे

उन्होंने राम चरित मानस के सिद्धान्तों एवं सार का प्राचार करने के लिये वाराणसी में अखिल भारतीय राम चरित मानस सम्मेलन की स्थापना की उनके मत के अनुसार, राम चरित मानस में प्रतिपादित सिद्धान्त किसी विशेष जाति या समुदाय के प्रति निर्देषित नहीं हैं बल्कि वे विश्व के सभी लोगों की भलाई तथा उत्थान के लिये है

वृन्दावन में उन्होंने प्रेम धाम आश्रम की स्थापना कीI उनके अनुसार, श्रद्धा एवं प्रेम सभी धर्मों से अधिक महान हैं और प्रेम ही ईश्वर है उन्होंने अनेक पुस्तकों जैसे कि "मोहन मोहिनी", "मानस माधुरी", "राम राज्य", "कीर्तन मंजरी", "पाषाणी अहिल्या", "मानस का मल्लाह", "धर्मावतार", "मुरली मनोहर", "भयंकर भूत", "राम गीता", "रास पंचाध्ययी", "सुमन संची", " बोध वाणी", "नवयुग विनोद" की रचना की

सम्पूर्ण भारत में उनके लाखों शिष्य हुये जो उन्हें देखकर, पढ़कर एवं सुनकर प्रसन्नता अनुभव करते थे जब वे वाराणसी की पावन नगरी में अपना आध्यात्मिक व्याख्यान देते थे तो लोग इतने मुग्ध हो जाते थे कि वे उन्हें सुनने के लिये अपना दैनिक काम-काज भी छोड़ देते थे राजा राम राम के उनके उच्चारण को सुनकर लोग मन्त्रमुग्ध हो जाते थे एक बार चित्रकूट में लगभग 20 लाख लोग उनके व्याख्यान को सुनने के लिये एक साथ एकत्रित हुये

उन्होंने देश्भक्ति नाटकों, कविताओं आदि कि रचना कर भारत के स्वतन्त्रता आन्दोलन में अपना योगदान दिया उन्होंने अपनी पुस्तक में ब्रिटिश सरकार को एक "रावण" की सरकार कहा सरकार ने उन्हें गिरफ्तार कर लिया, उन्हें न्यायालय में प्रस्तुत किया एवं उन पर सरकार की अवमानना का आरोप लगाया गया उन्होंने अपनी पुस्तक में समानताओं का वर्णन किया, इसलिये उन्होंने उन्हें गिरफ्तार कर लिया एवं उन पर गंभीर आरोप लगाया गया तब उन्होंने न्यायालय में कहा ’मैंने वहाँ जो लिखा उसे यदि आप स्वीकार करते हैं कि वास्तव में यह एक रावण के जैसी सरकार है तो आपसे कोई भी दण्ड पाने के लिये तैयार हू” इसके कारण उन्होंने उन्हें मुक्त कर दिया लेकिन उनके पुस्तक पर तब भी प्रतिबन्ध लगा रहा

राष्त्रपिता महात्मा गाँधी उन्हें बहुत चाहते थे गाँधीजी ने उन्हें दो अवसरों पर व्याख्यान देनॆ के लिये आमन्त्रित किया ताकि वे उन्हें स्वयं सुन सके और उन्होंने उन्हें एक पुस्तक लिखने के लिये प्रोत्साहित किया गोस्वामी श्री बिन्दु जी महाराज ने तब राष्ट्रिय रामायण एवं राम राज्य की रचना की
लेकिन राजनीति में उनकी कोई अभिरूचि नहीं थी भारत के प्रथम प्रधान्मन्त्री श्री जवाहरलाल नेहरू ने उन्हें चुनाव लड़्ने के लिये आमन्त्रित किया क्योंकि वे बहुत प्रसिद्ध थे और लोग उन्हें पसन्द करते थे, लेकिन उन्होंने प्रस्ताव स्वीकार नहीं किया और कहा: ’मैं एक राजनीतिक व्यक्ति नहीं हूँ मैं आध्यात्मिक हूँ और केवल आध्यात्मिक ही रहना चाहता हूँ’
वे वृन्दावन में ही अपना शरीर त्याग करना चाहते थे और जब वे बीमार थे एवं अस्पताल में थे तब उन्होंने अपनी इस आखिरी इच्छा को स्वामी बालकराम जी को दिल्ली में बताया इसलिये वे उन्हें वृन्दावन ले आये और 1 दिसम्बर, 1964 को उन्होंने वृन्दावन के प्रेम आश्रम में अपना शरीर त्याग दिया
आज के दिनों में जो कोई भी रामायण, भागवत एवं गीता पर व्याख्यान देता है या हिन्दी भजन तथा कीर्तन गाता है, वे सभी उनका कविता पाठ करते हैं श्री बिन्दु जी महाराज ने सर्वप्रथम एक आधुनिक सैद्धान्तिक उपदेश शैली का प्रयोग किया अपने जीवनकाल में वे न केवल एक उच्च कोटि के विद्वान थे बल्कि एक चमकते हुये सूरज भी थे जिन्होंने मनुष्य को जीवन के सभी बुराइयों से मुक्ति दिलानेवाले श्री राम कथा के विषय में एक नयी चेतना उत्पन्न की नि:सन्देह, आनेवाले कई युगों तक सम्पूर्ण मानवजाति श्री महाराज के अविस्मरणीय सुकृत्यों से लाभान्वित होता रहेगा

Sri Balak Ram Sharan Ji

सन्त गोस्वामी श्री बालक राम शरण जी "बिन्दुपाद" (श्री बिन्दु सेवा संस्थान, वृन्दावन के संस्थापक)

सम्पूर्ण विश्व में, श्री राम चरित मानस के प्रशंसकों के बीच, सन्त गोस्वामी श्री बालक राम शरण का नाम उच्च प्रतिष्ठा एवं श्रद्धा के साथ संदर्भित किया जाता है श्री महाराज जी श्री राम चरित मानस के विश्व प्रसिद्ध उपदेशक, मोहन-मोहिनी के अमर गायक एवं राम चरित मानस के आधुनिक उपदेश शैली के प्रतिपादक माननीय स्वर्गीय सन्त गोस्वामी श्री बिन्दु जी महाराज के पुत्र एवं प्रिय शिष्य थे

इस धर्मपुरूष गोस्वामी श्री बालक राम शरण "बिन्दुपाद" ने अपने गुरू का सच्चे अर्थ में अनुसरण किया और अपने पूर्वजों द्वारा छोड़े गये अधूरे कार्यों को और आगे बढ़ाया उन्होंने अपना सम्पूर्ण जीवन सर्वधार्मिक श्री राम कथा के सम्बन्ध में जनसाधारण की जागरूकता पैदा करने के लिये समर्पित करने का प्रण किया

आज श्री बालकराम जी आश्रम में रहते है तथा सस्कृत विद्यार्थीयों को संस्कृत विषय का अध्यन कराते है तथा सस्कृत विद्यार्थीयों को धार्मिक व नैतिक उपदेश देते है