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आज्ञा चक्र - तीसरी आँख |
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षष्टम चक्र, तीसरी आँख या शिवजी का नेत्र का स्थान वहाँ होता है जहाँ हम ध्यान के समय उस स्थान की ओर केंद्रित तथा एकाग्र करते हैं। यह चक्र हमारे अन्तर्ज्ञान तथा उन सभी क्रियाओं का है जो कि हमारे अवचेतन मन मे घटित होता है। यह समझ, ज्ञान तथा स्मृति के लिये स्थिर रहता है। शारिरीक तौर पर यह चक्र पीयूष ग्रंथि( मस्तिष्क के बीच की एक ग्रन्थि) तथा छोटे मस्तिष्क के क्रियाओं को सन्योजित करता है। आज्ञा चक्र में रूकावटों के कारण अनिद्रा, सर दर्द तथा थकावट जैसी समस्याएँ उत्पन्न होती है वहीं लोग षष्टम चक्र में उर्जा की अधिक मात्रा के कारण आत्मनियंत्रण, एक तेज दिमाक रखते है तथा एक अन्तर्ज्ञान होता है जो की कभी कभी एक योग्याता के साथ दुसरों के लिये सूक्ष्मदर्शी लगता है। आध्यात्मिक चिकित्सा सत्र में स्वामी जी चक्रों की उर्जा को नियंत्रित करते है तथा आपके आज्ञा चक्र मे होने वाली रूकावटों को हटा सकते है।यदि आप स्वयं अपने चक्रों के शुद्धिकरण के बारे मे अधिक जानकारी चाहते है तो चक्र कार्यशाला में स्वामी जी के मार्गानुसार भाग लेने के लिये आपका स्वागत है तथा यशेन्दु गोस्वामी जी के साथ चक्र नृत्य पार्टी में प्रतिभागी अपने षष्टम चक्र को उर्जित करने के लिये मंत्र ध्यान में बैठते है।यदि आप इस ध्यान क्रिया को अपने घरों में करना चाहते है तो आप यहाँ से षष्टम चक्र नृत्य संगीत ड़ाउनलोड़ कर सकते हैं।
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