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स्वाधिष्टान चक्र - सकराल चक्र |
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द्वितीया चक्र यौन चक्र होता है।नपुंसकता, मासिक धर्म, यौन सम्बन्धी रोग तथा बढती उम्र के साथ मासिक धर्म का बंद होना, यह कुछ सकराल चक्र में होने वाली रूकावटों की स्पष्ट पहचान है इसका प्रभाव प्रजनन तंत्र के साथ साथ युरिनरी सिस्टम पर होता है। यद्यपि स्वाधिष्टान चक्र में होने वाली रूकावटें हमारी भावनाओं पर असर करती है, यौन असुराक्षा तथा यौन उत्तेजना कि कमी परिणाम हो सकते है साथ हि साथ अत्यधिक यौन इच्छाएँ जो कि अपने साथी को धोखा देकर किसी दुसरे कि तरफ उत्तेजित कर सकती है। लेकिन यह केवल यौन भावनाओं के बारे में नही है, हमारी प्रत्येक प्रकार की भावनाएँ इस चक्र से जुडी हुई होती है तथा भावनाओं के फल स्वरूप भी जब नही जान पाते की आप को क्या चाहिये, इसी प्रकार इस चक्र का तत्व जल के भाँति आप अपनी भावनाओं को नही रोक पाते, तो भावनाओं को बहने दिजिए। जब प्रथम चक्र के साथ उर्जा अपने आप में एकाग्रचित होती है की आपका मूलआधार क्या है? तथा आप कहाँ से आये है, तब द्वितीय चक्र अपने आप को आपके दुसरे व्यक्ति के साथ सम्बंध के बारे मे सोचता है। यह भी कैसे एक मुल समस्या है जो कि द्वितीय चक्र में होने वाली रूकावटों से उत्पन्न होती है। यदी आपकी कोई द्वितीय चक्र से सम्बंधित कोई समस्या है तथा क्या आप अपने चक्र के उपचार के बारे में अधिक जानकारी जानना चाहते है अतः आप स्वामी जी की चक्र कार्यशाला में आ सकते है तथा आप सीख सकते हैं कि कैसे आप अपनी उर्जा शुद्ध कर सकते है, आप स्वामी जी के साथ आध्यात्मिक चिकित्सा सत्र में भी आ सकते है या चक्र नृत्य ध्यान में आइये, चक्र नृत्य पार्टी। इस अद्भुत ध्यान के लिये यह संगीत विशेषतः नृत्य के समय चक्रों को संतुलित करने लिये बनाया जाता है। स्वामी जी चक्र नृत्य पार्टी में चक्रों द्वारा आपको मार्गदर्शन देंगे तथा आप अपने चक्रों को अपने घरों पर भी चक्र नृत्य के द्वारा शुद्ध कर सकते है, इसके लिये आप चक्र नृत्य संगीत यहाँ से डाउनलोड कर सकते है।
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