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धर्म

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अपनी जिम्मेदारी स्वयं लें
स्वामी बालेंदु बता रहे हैं कि धर्म चाहता है कि लोग उसके निर्देशों पर चलें और लोगों को चाहिए कि वे अपने निर्णय खुद लें और उनके परिणामों की ज़िम्मेदारी भी लें।
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Freedom of Expression
स्वामी बालेंदु बता रहे हैं कि किस तरह धर्म स्वतंत्रता की उनकी परिकल्पना से बहुत अलग है: वह लोगों पर पाबंदी लगाता है, उनका मत-परिवर्तन करना चाहता है और यहाँ तक कि, जो प्रतिरोध करते हैं, उनकी हत्या करता है।
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इस्लाम और आतंकवाद
स्वामी बालेंदु स्पष्ट कर रहे हैं कि बिना घृणा के भी आप इस्लाम और उसके प्रसार को लेकर अपनी चिंताएँ व्यक्त कर सकते हैं क्योंकि हिंसा उसके धर्मग्रंथ का हिस्सा है।
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शरिया कानून
जर्मनी में 200 मस्जिदें तामीर करने के सऊदी अरब के प्रस्ताव पर स्वामी बालेंदु अपने विचार लिख रहे हैं। उनके अनुसार उन्हें चाहिए कि वे इस प्रस्ताव को सिरे से नामंज़ूर कर दें। क्यों? यहाँ पढ़ें।
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संथारा
स्वामी बालेंदु एक टी वी परिचर्चा का ज़िक्र कर रहे हैं, जिसमें वे भी शामिल हुए थे। यह चर्चा संथारा पर थी, जो जैन समुदाय की एक पुरानी परंपरा है और जो 75 साल से ऊपर के लोगों के बीच आत्महत्या को प्रोत्साहन देती है।
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धर्म का पाखण्ड
स्वामी बालेंदु उन लोगों के बारे में लिख रहे हैं जो धर्म द्वारा निर्मित भ्रमजाल में निवास करते हैं-या तो अंधी भेंड की तरह, सिर्फ दूसरों के आदेश का आँख मूंदकर पालन करते हुए या फिर पाखंडी, जो जानते तो हैं कि यह गलत है, फिर भी उसी नकली दुनिया में रहे आते हैं।
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भारत में गरीबी
स्वामी बालेंदु बता रहे हैं कि न जाने कितने लोग अपनी बुरी हालत को सहजता से स्वीकार कर लेते है और उसे बदलने के लिए कुछ भी नहीं करते-क्योंकि वे ईश्वर की इच्छा के विचार पर विश्वास करते हैं!
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आरती
स्वामी बालेन्दु अपने कुछ मेहमानों के साथ हुए अनुभवों का ज़िक्र कर रहे हैं, जिनमें उनसे धार्मिक समारोहों में शामिल होने की गुज़ारिश की गई थी। वे क्यों उन्हें अत्यंत हास्यप्रद और कुछ चिंताजनक मानते हैं, यहाँ पढ़िए।
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शिवलिंग का पूजन करती महिलायें
स्वामी बालेंदु बता रहे हैं कि वास्तव में वे क्यों सोचते हैं कि लिंग को लेकर कोई समस्या नहीं है- लेकिन पूजा अपने आप में ही समस्या है!
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लिंग भक्ति नेपाल, भारत और जापान में
स्वामी बालेन्दु शिवलिंग को लेकर प्रचलित एक और कहानी सुना रहे हैं-और साथ ही इसमें निहित हिन्दू धर्म के एक और पाखंड का पर्दा फाश कर रहे हैं।
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योनि में शिव लिंग
स्वामी बालेंदु शिवलिंग की पूजा के बारे में प्रचलित दो भिन्न-भिन्न कहानियाँ बता रहे हैं। हिंदुओं ने शिवलिंग की पूजा कैसे शुरू की, यहाँ पढिए।
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यमुना
ऊपर से अत्यंत नम्र दिखाई देने वाले बहुत से धार्मिकों के भीतर मौजूद अहंकार और उद्दंडता के बारे में स्वामी बालेंदु अपने विचार लिख रहे हैं।
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रेलवे स्टेशन पर गाय
स्वामी बालेंदु अपने आश्रम आए हुए एक मेहमान के प्रश्न का उत्तर दे रहे हैं। प्रश्न भारतवासियों द्वारा पवित्र मानी जाने वाली गाय के बारे में है, जिसके चमड़े का इस्तेमाल करने में उन्हें कोई दिक्कत पेश नहीं आती!
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मैक्स और उसके मित्रों का चैरिटी के लिए धन इ
स्वामी बालेन्दु अपने एक समलैंगिक मित्र की चर्चा रहे हैं, जिसे एक चैरिटी ने कहा कि वह अनैतिक और पथभ्रष्ट है जब कि वह उस चैरिटी की नियमित मदद करता रहा था। स्वाभाविक ही, चैरिटी को उसकी मदद मिलनी बंद हो गई!
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हमारे गेट के सामने लाउडस्पीकर
स्वामी बालेन्दु बता रहे हैं कि धार्मिक लोग धार्मिकता का प्रदर्शन करने के लिए ऊंचे स्वर में धार्मिक भजन लगाने और सर पर जटाएँ बढ़ाने से लेकर फेसबुक पर धार्मिक तुकबन्दियाँ लिखने जैसे न जाने क्या-क्या काम करते हैं।
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तुलसी
स्वामी बालेंदु आज मनाए जा रहे त्योहार के पीछे की कथा का वर्णन करते हुए दर्शा रहे हैं कि कैसे हिन्दू कथाएँ बलात्कार पीड़िता को खुद पर अत्याचार करने वाले बलात्कारी से विवाह करने की शिक्षा देती है।
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कपड़े और बलात्कार
स्वामी बालेंदु पुरुषों की दुनिया के पाखंड को अनावृत्त करते हुए बता रहे हैं कि ये पुरुष अपनी लड़कियों और पत्नियों से अपने कंधे, पैर और दूसरे अंग छिपाकर रखने को कहते हैं।
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प्रकृति
स्वामी बालेन्दु अपने एक जर्मन मित्र के बारे में बता रहे हैं जो अपने स्कूल में एक विषय के रूप में धर्म पढ़ाता है मगर ईसाइयत पर उसका कोई विश्वास नहीं है। उनके बीच हुई बातचीत यहाँ पढ़िए।
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पत्थर बन चुका पेड़
स्वामी बालेंदु बता रहे हैं कि कैसे हिन्दू दर्शन लोगों को उन अपराधों के लिए अपराधी ठहराता है, जो उन्होंने जीवन में कभी किए ही नहीं होते। इसका समाधान क्या है, उनके शब्दों में पढिए!
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जर्मनी
स्वामी बालेन्दु बता रहे हैं कि कैसे अलग-अलग धार्मिक विचारों वाले दो लोगों के रवैये, व्यवहार, बातचीत और दूसरी कई बातों में सामंजस्य नहीं रह पाता।
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हिन्दू मंदिर
स्वामी बालेंदु अपने स्कूली बच्चों के कुछ अभिभावकों के काम के बारे में जानकारी दे रहे हैं: वे पैसों के लिए मंदिरों में भजन गाते हैं और पुजारी की मदद करते हैं। बालेंदु जी इस विषय में क्या सोचते हैं, यहाँ पढ़िये।
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बुरका में बच्चे और औरतें
स्वामी बालेंदु इस प्रश्न पर चर्चा कर रहे हैं कि महिलाओं को यौन उत्पीड़न और बलात्कार से बचाने के लिए बनाई गई बुर्का प्रथा क्या अपने उद्देश्य की पूर्ति कर पा रही है।
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बतख को भोजन कराना और भगवान को भोजन कराना
स्वामी बालेंदु अपनी बच्ची द्वारा खिलौने के जानवरों को भोजन कराने के खेल की तुलना धार्मिक व्यक्तियों द्वारा भगवान की मूर्तियों को भोजन का प्रसाद चढ़ाने के प्रयास से कर रहे हैं।
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समलैंगिकता के खिलाफ विरोध प्रदर्शन
स्वामी बालेन्दु लिखते हैं कि किस तरह से सभी धर्म मानसिक हिंसा करते हैं|
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Nature
स्वामी बालेन्दु लिखते हैं कि आज भी दुनिया के कितने हिस्सों में धार्मिक क्रूरता विद्यमान है|
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केल्टिक प्रतीक
स्वामी बालेन्दु उन लोगों के विषय में बात करते हैं जो प्राचीन धर्मों और सभ्यताओं की आध्यात्मिकता से प्रभावित दिखते हैं, परन्तु आपको उनकी क्रूरताएँ भी देखनी चाहिए|
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स्वामी बालेन्दु
स्वामी बालेन्दु बताते हैं कि वो धर्म सुधारक नहीं हैं|
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हिन्दुओं की वेशभूषा में विदेशी
स्वामी बालेन्दु लिखते हैं कि क्यूं हिन्दु गुरुओं ने गैर-हिंदुओं को अपना अनुयायी बनाना शुरू किया जबकि हिन्दुत्व में धर्म-परिवर्तन संभव ही नहीं है|
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कुम्भ मेले में विदेशी
स्वामी बालेन्दु कुंभ मेले में अपनी चमक-दमक दिखा रहे उन विदेशी साधुओं के बारे में बता रहे हैं जो हिन्दु गुरू के रूप में स्वीकार्य हैं, जबकि हिन्दु धर्म में बाहरियों के लिए कोई स्थान ही नहीं|
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कुंभ मेले को भोग रहे विरक्त नागा साधू
स्वामी बालेन्दु बताते हैं कि नागा साधुओं की मूल अवधारणा क्या है, उनका आचरण कैसा होना चाहिए था और आज असल में है कैसा। भारत के नंगे किन्तु पवित्र पुरुषों के ऊपर एक आलोचनात्मक दृष्टि|
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धार्मिक श्रद्धालु और प्रदूषित नदी
स्वामी बालेन्दु लिखते हैं कि कुम्भ स्नान की वजह से गंगा में प्रदुषण का स्तर कितना बढ़ गया!
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शंकराचार्य स्वरूपानंद और कुम्भ मेला
स्वामी बालेन्दु उस घटना के विषय में लिखते हैं जब शंकराचार्य ने मनपसंद जगह न मिलने पर कुम्भ मेले में आने से मना कर दिया|
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सोने चांदी की सिंहासनों में बैठने वाले साê
स्वामी बालेन्दु कहते हैं कि धन का प्रदर्शन करने वाले साधु क्या सच में साधु सन्यासी हैं?
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गंगा नहाते साधू
स्वामी बालेन्दु कुम्भ मेले के विषय में प्रचलित पापों को धोने वाले विश्वास के विषय में अपने विचार लिखते हैं|
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कुम्भ मेले में बच्चे
स्वामी बालेन्दु उन बच्चों के विषय में लिखते हैं जो भगवान की ड्रेस में भीख माँगते हैं|
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समुद्र मंथन
स्वामी बालेन्दु कुम्भ मेले के पीछे की कहानी का वर्णन करते हैं|
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राजस्थान में प्रकृति का दृश्य
स्वामी बालेन्दु भारत में बलात्कार और यौन उत्पीड़न की समस्या के मूल में धर्म है इस विषय पर अपने विचार रखते हैं कि धर्म ने ही औरत को कमज़ोर और दोयम दर्जे का नागरिक बनाया है|
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नानी जी
स्वामी बालेन्दु उनकी माँ की मृत्यु पर उनके पिता और नानी की धार्मिक मान्यताओं के विषय में तथा उनकी नानी का धर्म के विषय में विचार लिखते हैं|
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अपरा के जन्म महोत्सव पर अम्मा जी
स्वामी बालेन्दु ने मृत्यु के तेरह दिन बाद होने वाले परम्परागत रिवाज तेरहवी का वर्णन किया| पढ़ें उन्होंने अपने परिवार के साथ इस समय क्या किया|
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अम्मा जी अपने जन्मदिन पर
स्वामी बालेंदु बता रहे हैं कि कैसे उनके पिता को बड़ा दुख हुआ जब उनके प्रिय मित्र ने अम्माजी के देहांत के बाद उन्हें दिलासा देने की जगह धार्मिक परंपरा को निभाना उचित समझा।
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मेरा परिवार
स्वामी बालेन्दु बता रहे हैं कि कैसे उनकी माँ की मृत्यु के समय लोगों के धार्मिक रीति-रिवाजों के कारण उन्होंने बहुत प्रताड़ित महसूस किया था।
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भोजन के समय बच्चे
स्वामी बालेंदु धर्म और उसके प्रभाव के विषय पर लिख रहे हैं। हालांकि धर्म से अच्छी और बुरी दोनों बातें उद्भूत होती रही हैं मगर वर्तमान में धर्म अपनी बुरी बातों पर अच्छी बातों की चादर ओढ़ने का प्रयास करता नज़र आता है।
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सविता हलप्पनवार
स्वामी बालेंदु आयरलैंड में घटी एक दुर्घटना के बारे में बता रहे हैं जिसमें धर्म, कानून और डॉक्टर के निर्णय के दरमियान होने वाले विवादों के चलते एक भारतीय महिला अपनी जान से हाथ धो बैठती है।
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वृन्दावन में ध्वनि प्रदूषण
स्वामी बालेंदु अपने और दूसरे शहरों और कस्बों के शोर के बारे में बता रहे हैं। साथ ही इस शोर के अतिरेक के विरुद्ध अपना प्रतिरोध भी दर्ज करा रहे हैं जिसमें तीखे स्वरों में धार्मिक गाने बजाए जाते हैं और जो सिर्फ ध्वनि-प्रदूषण को बढ़ाते हैं।
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गैदेरी देगाग्विता - नयी कैथोलिक संत
स्वामी बालेंदु एक अमरीकी मूल की संत गैदेरी देगाग्विता के बारे में बता रहे हैं जिसके पास उपचार की शक्ति होने का दावा किया जाता रहा है-मगर सिर्फ कैथोलिक्स के लिए!
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धर्म को पैसा चाहिए
स्वामी बालेंदु उन लोगों के बारे में लिख रहे हैं जो कहते हैं कि वे आधे धार्मिक हैं। धर्म जो भी पचा सकता है निगल जाता है-और इसीलिए उसके साथ बहुत गंभीरता से पेश आने की ज़रूरत है।
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खुली हवा का मज़ा लेता मेंढक
स्वामी बालेंदु उन लोगों के बारे बता रहे हैं जिनका लालन-पालन धार्मिक और कूटमंडूक माहौल में हुआ है और जो धर्म पर आँख मूंदकर विश्वास करते हैं। ऐसी हालत में आप क्या करें? पढिए।
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स्वामी बालेन्दु 1994 में प्रवचन करते हुए
स्वामी बालेंदु इस आम धारणा के बारे में लिख रहे हैं जिसके अनुसार नास्तिक इतने मूर्ख माने जाते हैं कि वे धर्म को समझ ही नहीं सकते। क्या यह सच है कि उनमें इतनी बुद्धि नहीं होती कि वे धर्म की बारीकियों को समझ सकें?
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स्वामी बालेन्दु
स्वामी बालेंदु धर्म और आध्यात्मिकता से संबन्धित प्रश्नों पर गहराई से सोचने के बाद 15 चुने हुए प्रश्न सबके सामने रख रहे हैं, जिन्हें धार्मिक और आध्यात्मिक व्यक्तियों को अपने आप से पूछना चाहिए।
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धार्मिक पागलपन के समय डंडौती परिक्रमा करत
स्वामी बालेंदु धार्मिक समर्पण के विषय में लिख रहे हैं जो लोगों को ऐसे-ऐसे काम करने पर मजबूर कर देता है, जिसे वे स्वयं पागलपन कहेंगे, बशर्ते वे धर्म की चालबाज़ियों को समझ सकें। उदाहरणार्थ प्रस्तुत है उनकी, स्वयं की आपबीती!
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बुद्धा
स्वामी बालेंदु बौद्ध धर्म और उसकी परम्पराओं के बारे में लिखते हुए जानकारी दे रहे हैं कि उसमें अपने धर्मगुरु, लामा का चुनाव किस तरह किया जाता है। पूरी प्रक्रिया के बारे में पढ़ें और यह भी कि बालेंदु जी क्यों इसे बहुत निरर्थक और मूर्खतापूर्ण मानते हैं।
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हिन्दू मंदिर में केवल हिन्दू ही प्रवेश कर 
स्वामी बालेंदु गैर हिंदुओं के हिन्दू मंदिरों में प्रवेश पर पाबंदी के बारे में लिख रहे हैं। वे इसे नस्लवादी रवैया मानते हैं; क्यों? यहाँ पढिए।
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हिन्दू धर्म अपनाये हुए विदेशी
स्वामी बालेंदु उन लोगों के बारे में लिख रहे हैं जो अपना धर्म छोड़ कर हिन्दू धर्म अपना लेते हैं, जब कि हिन्दू धर्म में धर्म-परिवर्तन की कोई गुंजाइश ही नहीं है। ऐसे निरर्थक कामों से पैदा होने वाली हास्यास्पद स्थिति की विडम्बना के बारे में यहाँ पढ़िये।
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बच्चों के भोजन का समय
स्वामी बालेंदु धर्म के बारे में लिखते हुए बता रहे हैं कि वह एक तरह की निरंकुश शासन-व्यवस्था है (तानाशाही राजनीति) है, जिसमें कानून तो हैं मगर जो अपने क़ानूनों को कभी संशोधित नहीं करती है।
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आश्रम में बच्चे
स्वामी बालेंदु बता रहे हैं कि अंधविश्वास के विपरीत, जिस पर आप आँख मूँदकर भरोसा करते हैं, सत्य वह है जिसे आप जान सकते हैं।
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विभिन्न धर्मों के प्रतीक चिन्ह
ईसाइयत, इस्लाम और हिन्दू धर्म के मूर्खतापूर्ण धार्मिक नियमों की तीन अलग-अलग सूचियों का विश्लेषण करने के बाद स्वामी बालेंदु अपने निष्कर्षों का वर्णन कर रहे हैं।
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कुरान
स्वामी बालेंदु कुरान में पाई जाने वाली अजीबोगरीब आयतों के बारे में लिख रहे हैं, जो क्रूरता और अकल्पनीय विचारों से भरी हुई हैं।
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हिन्दू धर्मग्रन्थ
स्वामी बालेंदु हिन्दू धर्मग्रंथों में पाए जाने वाले उन नियमों के कुछ उदाहरण प्रस्तुत कर रहे हैं, जो दर्शाते हैं कि वे आधुनिक युग में पूरी तरह अप्रासंगिक हो चुके हैं और यह भी कि अधिकतर धर्मग्रंथों में क्रूरता का बोलबाला है।
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बाइबल
स्वामी बालेंदु एक बार फिर इस बात को रेखांकित कर रहे हैं कि क्यों धर्मग्रंथों को शब्दशः ग्रहण करना आवश्यक है। इस सूची में दिये गए ईसाई श्रद्धालुओं के इन नियमों को पढ़ें और समझें!
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स्वामी बालेन्दु
स्वामी बालेंदु नास्तिकों और उनके विश्वासों के विषय में लिखते हुए बता रहे हैं कि वे किस तरह उनसे सहमत हैं, जब कि उनके कुछ सिद्धांतों से उनकी असहमति भी है।
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Children at the Ashram
स्वामी बालेंदु एक महिला के साथ सम्पन्न सलाह सत्र का वर्णन कर रहे हैं, जिसमें वह महिला समझ नहीं पा रही थी कि किस पर विश्वास किया जाए-धर्म पर वह विश्वास नहीं करना चाहती थी मगर नास्तिकता पर भी उसका विश्वास नहीं था क्योंकि उसके आगे भी कुछ न कुछ है। लेकिन न्यूएज आन्दोलन तो कुछ ज़्यादा ही है। इस समस्या का क्या समाधान हो सकता है, यहाँ पढ़ें।
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स्वामी बालेन्दु, मानसून की पहली बरसात का म
स्वामी बालेंदु धर्म के नियंत्रण और उसकी धोखाधड़ी (उसके छल-कपट) के बारे में लिखते हुए बता रहे हैं कि वह अपने अनुयायियों को धार्मिक आदेशों को मानने और ईश्वर पर भरोसा रखने का उपदेश देता है, मगर उन धार्मिक अवधारणाओं को समझने की सलाह नहीं देता।
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बुद्ध
कुछ लोग कहते हैं कि बुद्धिज़्म धर्म नहीं है बल्कि एक दर्शन है! इस विषय में स्वामी बालेंदु का नज़रिया क्या है, यहाँ पढिए।
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बुद्ध, दयानन्द सरस्वती और मार्टिन लूथर
स्वामी बालेंदु सिद्धार्थ गौतम, मार्टिन ल्यूथर और दयानन्द सरस्वती जैसे लोगों के बारे में लिख रहे हैं, जो धर्म में परिवर्तन लाना चाहते थे।
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स्वयं को पीड़ा पहुँचाने का कुम्भ मेला में ध
स्वामी बालेंदु बता रहे हैं कि कैसे पाप और अपराध के विचार को आधार बनाकर धर्म लोगों पर नियंत्रण प्राप्त करता है। डर के मारे लोग अपने ही शरीर पर अत्यधिक (अकल्पनीय) ज़ुल्म ढाते हैं।
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काली
स्वामी बालेंदु धर्म और अपराध के बीच के सम्बन्धों पर प्रकाश डालते हुए उदाहरण सहित बता रहे हैं कि क्यों वे मानते हैं कि बहुत हद तक धर्म खुद अपराधियों को अपराध करने के लिए प्रोत्साहित करता है और उन्हें बाद में पनाह भी देता है।
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धर्मग्रन्थ
स्वामी बालेंदु धर्मग्रंथों और उनमें पाए जाने वाली हिंसा के विषय में लिख रहे हैं। जिन ग्रन्थों को पवित्र कहा जाता है, उनमें ऐसी हिंसा क्यों होती है?
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सूर्य-ग्रहण
स्वामी बालेंदु धर्म की शुरुआत के बारे में लिखते हुए बता रहे हैं कि कैसे डर ने लोगों को ईश्वर और धर्म पर विश्वास करने पर मजबूर किया और कैसे धार्मिक गुरु आजकल इसी बात का लाभ उठा रहे हैं, बावजूद इसके कि लोगों के ज्ञान में काफी इजाफा हो चुका है।
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आश्रम में बच्चों का भोजन
स्वामी बालेंदु उन आस्थाओं और विश्वासों के विषय में लिख रहे हैं, जो नुकसान पहुंचाते हैं और समझा रहे हैं कि किस सीमा के बाद दूसरों की उन आस्थाओं पर आपको कड़ी आपत्ति प्रकट करनी चाहिए।
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आश्रम में बच्चों का भोजन
स्वामी बालेंदु राम चरित मानस नामक धर्मग्रंथ के एक पसंदीदा पद का उल्लेख करते हुए उसकी व्याख्या कर रहे हैं और बता रहे हैं कि उनके विचार में इस पर सभी को अमल करना चाहिए।
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यमुना किनारे मंदिर
अंग्रेज़ी में धर्म (रिलीजन) शब्द के आम-फहम अर्थ के स्थान पर स्वामी बालेंदु धर्म का वास्तविक अर्थ लिख रहे हैं।
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तिरुपति मन्दिर
स्वामी बालेंदु दक्षिण भारत में स्थित तिरुमाला वेंकटेश्वर मंदिर के बारे में लिख रहे हैं और बता रहे हैं कि कैसे वह मंदिर करोड़ों श्रद्धालुओं के कारण ईश्वर के व्यापार में लिप्त है।
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आश्रम में बच्चों का भोजन
स्वामी बालेन्दु धर्म के सकारात्मक प्रभावों के बारे में लिख रहे हैं और पूछ रहे हैं कि धर्म के बिना भी क्या यह सब संभव नहीं था!
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आश्रम में बच्चों का भोजन
स्वामी बालेन्दु धर्म के नकारात्मक प्रभावों के बारे में, बच्चों और महिलाओं के उत्पीड़न और छूआछूत के बारे में लिखते हुए बता रहे हैं कि छलछद्म करके कैसे धार्मिक लोग उत्तरोत्तर धनाढ्य होते गए।
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बच्चे खेलते हुए
स्वामी बालेंदु बहुत से देशों में धर्म की वर्तमान स्थिति का वर्णन कर रहे हैं और समझा रहे हैं कि क्यों वे मानते हैं कि धर्म के महत्व में आ रही कमी सकारात्मक बात है।
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धर्म का कोई भविष्य नहीं
स्वामी बालेंदु विश्व के तीन धर्मों के रहनुमाओं की मीटिंग का वर्णन कर रहे हैं और समझा रहे हैं कि वे कैसे इस नतीजे पर पहुंचे कि धर्म का नाश सन्निकट है।
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इस्लाम में औरत
स्वामी बालेन्दु ईरान और सऊदी अरब में दो महिलाओं के विरुद्ध हुई कानूनी क्रूरता के दो प्रकरणों का वर्णन कर रहे हैं। उन प्रकरणों पर विस्तार से पढ़िए और जानिए कि क्यों स्वामी बालेन्दु इन देशों की यात्रा नहीं करना चाहते।
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आश्रम में बच्चों का भोजन
स्वामी बालेन्दु अपने एक कर्मचारी का किस्सा बयान कर रहे हैं, जिसने बाद में प्रचारक का काम शुरू कर दिया। यह सिर्फ उसका किस्सा नहीं है बल्कि वृन्दावन में बहुत से लोग यही करते हैं।
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आश्रम में बच्चों का भोजन
स्वामी बालेन्दु उन ईसाई धर्मप्रचारकों के बारे में लिख रहे हैं, जो ग़रीबों का धर्मपरिवर्तन करने में लगे हुए हैं और उन हिन्दू राष्ट्रवादी संगठनों के बारे में भी, जो उनके प्रयासों का हिंसक विरोध कर रहे हैं।
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हिन्दू धर्म और ईसाईयत
पहले ईसाई धर्मप्रचारक गरीब हिन्दुओं का ईसाईयत में धर्म-परिवर्तन कराते हैं और फिर हिन्दू धर्मप्रचारक आकर उन्हें हिन्दू बना देते हैं। स्वामी बालेन्दु का इस विषय में क्या कहना है, यहाँ पढ़िए।
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जन्मदिन का भोजन
स्वामी बालेन्दु बता रहे हैं कि कैसे हिन्दू धर्म और ईसाइयत लोगों में आत्मग्लानि और भय पैदा करते हैं, जिससे बहुत सी समस्याएँ खड़ी हो जाती हैं। आप दैनिक जीवन में पापकर्म करते हैं और आपको अपने पापों का स्वीकार करके उनका प्रायश्चित्त करना चाहिए।
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आश्रम में बच्चों का भोजन
स्वामी बालेंदु उन अपराधियों के बारे में लिख रहे हैं, जो जानते हैं कि उन्होंने वाकई अपराध किया है और इसलिए मंदिरों में जाकर अपने अपराध का स्वीकार करते हैं और वहाँ चन्दा वगैरह देकर अपने अन्तःकरण की शुद्धि करते हैं।
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पोप और भीड़
स्वामी बालेंदु हिंदुओं और ईसाइयों की उपासना-विधियों की साम्यता के बारे में बताते हुए स्पष्ट कर रहे हैं कि किस तरह ये विधियाँ ज़्यादा भिन्न नहीं है।
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धार्मिक घृणा
स्वामी बालेंदु दुनिया भर में चल रहे उन मुस्लिम-विरोधी आंदोलनों के बारे में लिख रहे हैं, जिनका ज़िक्र ओस्लो के एक निशानेबाज, ब्रेविक ने अपने मेनिफेस्टो में किया है। इस घोर सांप्रदायिक घृणा के प्रतिरोध-स्वरूप हम क्या कर सकते हैं, इस विषय में बालेंदु जी के विचार यहाँ पढ़िए।
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स्कूल में बच्चे
स्वामी बालेन्दु स्कूलों में प्रदान की जा रही धार्मिक शिक्षा के बारे में लिखते हुए बता रहे हैं कि क्यों उनके विचार में स्कूलों में धार्मिक शिक्षा नहीं दी जानी चाहिए।
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आश्रम में बच्चों का भोजन
स्वामी बालेंदु समझा रहे हैं कि किस तरह बच्चे अपने अभिभावकों की आस्थाओं के प्रभाव में बड़े होते हैं। उनका खुद का कोई धर्म न भी हो तो भी बच्चों के विश्वास को वे प्रभावित करते ही हैं।
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Ashram Monkey
Swami ji writes about spirituality and how it is not usually accepted in the western society if someone is spiritual and religious and talks about God.
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Swami Ji
Swami Ji writes about the terror attacks which took place in Mumbai, India. He asks how terrorists can lose the respect for their own life and the life of others.
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Flower
Swami Ji talks about the serial bomb blasts in Delhi which took place in the evening. He asks why people do this in the name of religion and God.
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Swami Ji - Church and Religions
Swami ji talks about pressure in a religion and how it makes people turn away. He does not consider himself follower of any religion. Love is his religion.
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Swami Ji
Swami Ji explains a phrase from a scripture in which it is said that it is the best religion to help others.
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Swami Ji in Chakra Dance Party
In the Yoga teacher training Swami Ji talks about Patanjali and the Yoga Sutras and the word Dharma which is normally translated as religion but which means much more than that.
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News and Announcements

आध्यात्मिक

अपने जीवन का अर्थ जानें और प्रसन्न रहें, मैं इसी को आध्यात्मिकता कहता हूँ!

आसक्ति

जब आप किसी को खुशियाँ देकर प्रसन्न हो वही वैराग्य है!

सम्बन्ध

जब आप किसी व्यक्ति से यह अपेक्षा करते हैं कि वह आपके जैसा हो तो आप नव विवाहित दंपति से आपस में दो स्वतंत्र व्यक्तियों के रूप में मधुर संबंध स्थापित करने की स्वतन्त्रता छीन लेते हैं, जो दो अलग-अलग संस्कृतियों से आए दंपति को सहज प्राप्त होती है।

सम्बन्ध

अजीब बात है, अलग-अलग संस्कृतियों और भाषाओं के बीच सम्प्रेषण अधिक स्पष्ट और आसान है!

प्रसन्नता

जबरदस्ती अपने आपको झूठी ख़ुशी के हवाले न करें

अपेक्षा

कृपया इस आत्मग्लानि में न जियें कि अपने आपसे आपकी अपेक्षाएँ बहुत ज़्यादा हैं और उन्हें आप कम भी नहीं कर पा रहे हैं।

अपेक्षा

खुद से अपनी नैसर्गिक सीमाओं से ज़्यादा की अपेक्षा न रखें

अहंकार

अहं के साथ संघर्ष - स्वयं के साथ एक लगातार कशमकश?

मित्र

उस मित्रता का अंत कर दें, जो आपको सिर्फ थकाने का काम करती है

धर्म

धर्म की एक चाल है कि आपके मस्तिष्क को इतना सुन्न कर दिया जाए कि आप उसके आदेशों पर प्रश्न ही ना कर सकें, भले ही वह आदेश कितना भी मूर्खतापूर्ण क्यों न हो। आपसे कहा जा रहा है कि आप अपने दिमाग का दरवाजा बंद करके, जैसा कहा जा रहा है वैसा करते चले जाएँ।

ईश्वर

गणेश और स्पाइडरमैन - बच्चों के लिए दो एक जैसे सुपरहीरो!

गुरु

धार्मिक परम्पराएँ शिष्यों को गुरुओं के अपराधों पर पर्दा डालने पर मजबूर करती हैं!

सौन्दर्य

दूसरों से तुलना करने पर न तो आपकी सुन्दरता बढ़ती है न ही घटती है

प्रसन्नता

दूसरों के साथ अपनी तुलना मत कीजिए और खुश रहिए!

धन

यह कहना कोई नई बात नहीं होगी कि यह समाज धन-केन्द्रित है। यह भी कोई नई बात नहीं है कि व्यापक जनसमुदाय एकल व्यक्ति की कोई परवाह नहीं करता। लेकिन आप खुद क्या सोचते हैं? आप क्यों इस खेल में लगे हुए हैं?

अहंकार

आधुनिक समाज लोगों को यह सिखाता है: अगर आप उत्कृष्ट हैं तो आप अच्छे हैं। आप अच्छे हैं अगर आप 'नंबर वन' हैं। अगर आप ऊपरी लोगों में से एक हैं तो आपका अहं कृत्रिम रूप से बढ़ जाता है और आप और भी अधिक अच्छा काम करना चाहते हैं, जिससे आप कंपनी की बिक्री और लाभ बढ़ा सकें।

आत्म सम्मान

आप खास हैं क्योंकि आप, आप हैं- इसलिए नहीं कि आप क्या करते हैं!

आत्मविश्वास

वही करें जो आप ठीक समझते हैं। जी हाँ, हो सकता है कि लोगों के तीखे ताने और आलोचनाएँ सुनने और सहने के लिए आपको कुछ अधिक साहस का परिचय देना पड़े। यह कभी-कभी आपको बहुत बेचैन भी कर सकता है लेकिन अपने इरादे और अपनी इच्छा के विपरीत आचरण करना आपके लिए उससे ज़्यादा बेचैन करने वाला हो सकता है।

गुरु

क्यों आप खुद कठपुतली बनकर अपने जीवन को किसी गुरु के हवाले करना चाहते हैं?

बच्चे

पूर्णकालिक स्कूलों में भेजकर, क्या हम अपने बच्चों को रोबोट बना देना चाहते हैं?

अन्धविश्वास

आस्था और अंधविश्वास में कोई फर्क नहीं - अपनी आस्था पर विश्वास करना बंद करें!

ईश्वर

ईश्वर पर पूरी तरह विश्वास करना ठीक नहीं है क्योंकि अगर आप ऐसा करते हैं तो आप सोचते रह जाएंगे कि वह आकर आपको बचा लेगा और इधर आपकी जान चली जाएगी। हाँ, ईश्वर को आप मूर्ख बना सकते हैं, उसे धोखा दे सकते हैं, यह कहकर कि मैं तुम पर पूरा विश्वास करता हूँ, जबकि आप खुद जानते हैं कि आप उस पर उतना विश्वास नहीं करते!

मित्र

दोस्ती यदि किन्हीं विशेष कारणों से करी है तो उन कारणों के ख़त्म होने पर दोस्ती भी ख़त्म हो जाती है.

मान्यताएं

नास्तिक उन बातों के लिए अपराधबोध से ग्रसित नहीं होते जो उन्होंने नहीं की हैं या उनके काबू में नहीं हैं बल्कि अपने कर्मों या गलत निर्णयों के परिणामों को भुगतने के लिए तैयार रहते हैं।

प्रेम

आपका प्रेम संबंध पल भर का भी हो सकता है जिसमें आप आँखों ही आँखों में कितना कुछ कह जाते हैं। एक क्षण, जिसमें आप महसूस कर लेते हैं कि यह दुनिया आपकी और उसकी साझा मिल्कियत है। इससे ज़्यादा कुछ नहीं।

ईश्वर

अगर मैं, आप और हम सब ईश्वर हैं तो आप ये उपदेश किसे दे रहे हैं?

ईश्वर

आस्तिक स्वयं को धोखा देते हैं यह कहकर कि हर बुरी घटना के पीछे ईश्वर का विधान है.

ईश्वर

मुझे आपके भगवान से कोई परेशानी नहीं होगी यदि वह सोने के जेवर पहनकर और 56 भोग लगाकर रुपहली दीवारों से घिरे मंदिरों में न बैठा रहे बल्कि यहाँ आकर देखे कि पेट भर रोटी कमाने के लिए कितनी मेहनत करनी पड़ती है.

ईश्वर

मुझे आपके भगवान से कोई परेशानी नहीं होगी यदि वह अपने भक्तों से कहे कि 'कृपा करके अपने धर्म और अपनी श्रद्धा को घर की चारदीवारी के भीतर अंजाम दें, सड़क पर नहीं.'

ईश्वर

मुझे आपके भगवान से कोई परेशानी नहीं होगी यदि वह अपराधियों से भक्ति की रिश्वत न ले और उन्हें सफल बनाकर और ज़्यादा अपराध करने के लिए प्रोत्साहित न करे.

ईश्वर

मुझे आपके भगवान से कोई परेशानी नहीं होगी यदि लोग उसके नाम पर दूसरों को झूठा दिलासा न दें.

ईश्वर

मुझे आपके भगवान से कोई परेशानी नहीं होगी यदि वह यह नहीं मानता कि महिलाएं पुरुषों की तुलना में किसी कदर कम बुद्धिमान, मनहूस और कम लायक हैं.

ईश्वर

मुझे आपके भगवान से कोई परेशानी नहीं होगी यदि वो यह निश्चित करे कि गरीबी, भुखमरी, युद्ध और बलात्कार इत्यादि उसकी मर्ज़ी से नहीं होते.

मित्र

एक कदम आगे बढ़ाकर सम्बन्धों में निकटता पैदा करें: सामने वाले को 'दोस्त' कहकर पुकारें

ईश्वर

अगर आप डर रहे हैं तो यह ज़रूरी नहीं कि मैं भी डर जाऊँ। अगर आप भोजन करते हैं तो मेरा पेट नहीं भरता। इसी तरह सिर्फ इसलिए कि आप ईश्वर पर विश्वास करते हैं मैं भी ईश्वर पर विश्वास करूँ यह मुझे मंजूर नहीं!

ईश्वर

मुझे ईश्वर का कोई अनुभव नहीं हुआ है और दूसरों का अनुभव मेरे किसी काम का नहीं है। अगर मैं कहीं यह पढ़ लूँ कि ईसा मसीह ने ईश्वर से बात की या मोहम्मद पैगंबर ने ईश्वर का अनुभव किया या सूरदास या तुलसीदास को ईश्वर की अनुभूति हुई तो सिर्फ पढ़कर मैं ईश्वर पर विश्वास क्यों और कैसे करने लगूँ। यहाँ तक कि मेरा दोस्त भी कहे कि उसने ईश्वर का कई बार अनुभव किया है तो भी मैं यह नहीं कह सकता कि मैं ईश्वर पर विश्वास करता हूँ- जब तक कि मैं खुद उसका अनुभव नहीं कर लेता!

गुरु

असुरक्षा और आत्मविश्वास की कमी लोगों को गुरु की खोज में लगा देते हैं!

जीवन

जीवन में असुरक्षा के एहसास के कारण आपको दूसरों से आश्वस्ति की ज़रूरत होती है!

प्रेम

आपकी महान संस्कृति कहती है कि प्रेम करना पाप है. आप अपनी बेटियों को सिखाते हैं कि लड़कों से बात भी मत करना और उसी बेटी को अरेंज मैरिज के बाद नितान्त अजनबी के साथ सेक्स करने पर मजबूर कर देते हो!

प्रसन्नता

क्या आप यह नहीं समझते कि आपकी व्यक्तिगत खुशी, समाज क्या ठीक समझता है, इससे ज़्यादा महत्वपूर्ण है?

परिवार

आयोजित विवाहों (अरेंज्ड मैरेज) के बाज़ार में कोई भी तलाक़शुदा व्यक्ति को अपना लड़का या लड़की देना पसंद नहीं करता। लड़कियों को तो टूटा-फूटा समान ही समझा जाता है और पुरुषों को? पता नहीं वह कैसा है? हो सकता है पीकर पत्नी को मारता-पीटता हो...ज़रूर कोई बहुत बुरा आदमी होगा अन्यथा क्यों उसका पहला विवाह टूटता?

परिवार

भारतीय दोहरा चरित्र: लड़की के लिए जींस और बहू के लिए साड़ी!

सम्बन्ध

अरेंज्ड मैरेज यानी शादी मैंने आपसे करी है या पूरे परिवार से!

सम्बन्ध

भारतीय समाज में ढ़ोर-बाज़ार की तरह बच्चों के सौदे हो रहे हैं और बहुत से लड़के लड़कियां ऐसी शादियों को उचित भी समझते हैं।

ईश्वर

किसी ने यह कहते हुए कि 'ईश्वर ने स्त्री को अलग बनाया है' उसके प्रति होने वाले भेदभावों को जायज़ ठहराने की कोशिश की, बिना यह सोचे कि फिर तो पुरुष भी ईश्वर द्वारा अलग ही बनाए गए हैं!

अपेक्षा

भारतीय अपनी औरतों से बहुत अपेक्षाएं रखते हैं!

धर्म

वे लड़कियां जो अभी रजस्वला नहीं हुई हैं। जैसे ही माहवारी शुरू हुई ये लड़कियां देवी नहीं मानी जाएंगी। वैसे तो कई लड़के और बड़ी लड़कियां भी भोजन करने आ जाती हैं मगर सिर्फ और सिर्फ वही लड़कियां देवी मानी जाती हैं और पूजी जाती हैं जिनकी माहवारी अभी शुरू नहीं हुई हैं।

पालन पोषण

आप अपने बच्चों के सबसे अच्छे विशेषज्ञ हैं

पालन पोषण

क्या यह दुखद नहीं है कि आप समझें कि आपके बच्चे ने पति के साथ आपके प्रेम-संबंध में सेंध लगा दी है? कि आपको प्रेम करने के लिए भी छुट्टी लेनी पड़ती है, अपने साथी के साथ रहने के लिए बच्चे से मुक्त समय! आप अपने पारिवारिक जीवन का पूरा आनंद नहीं उठा पातीं क्योंकि आप बच्चे को दिए जाने वाले अपने समय को अपना नुकसान समझती हैं।

दृष्टिकोण

बच्चे कैसे हों? इस विषय पर विभिन्न सांस्कृतिक पृष्ठभूमि के चलते भिन्न-भिन्न दृष्टिकोण होना स्वाभाविक है.

धर्म

जब कोई मुस्लिम औरत बलात्कार का शिकार होती है, इस्लाम का नियम यह कहता है कि उसे चार गवाह प्रस्तुत करने होंगे अन्यथा फैसला उसके विरुद्ध सुनाया जाएगा। कल्पना कीजिए, बलात्कार की शारीरिक प्रताड़ना के बाद उसे मानसिक रूप से ध्वस्त करने का पूरा इंतज़ाम है।

धर्म

जिसे आप अछूत कहते हैं उस व्यक्ति को कैसा लगेगा जब उसे पता चलेगा कि जैसे ही उसने आपको छुआ, आपने अपने आपको शुद्ध करने के लिए नहाने का निर्णय ले लिया है?

धर्म

कितना क्रूर है यह जबकि आप किसी इन्सान को यह प्रदर्शित करें कि आप उसका हाथ भी नहीं छू सकते क्योंकि उसने एक अछूत परिवार में जन्म लिया था?

धर्म

हमारा देश भारत, इतने अर्से बाद भी जाति प्रथा को समाप्त नहीं कर पाया है। इस प्रथा की जड़ें धर्म में हैं और धर्म के कारण आज भी बहुत से लोग हैं जिन्हें अछूत समझा जाता है।

धर्म

अतीत में धर्म क्रूर थे और आज भी वैसे ही हैं

धर्म

इसी दुनिया में ऐसी जगहें हैं जहां औरतों को मारा पीटा जाता है क्योंकि धर्म उनके माता-पिता और पतियों को आदेश देता है कि अगर औरतें आज्ञाकारी नहीं हैं तो उन्हें अनुशासन में रखना उनका कर्तव्य है। क्या सच में आप ऐसे धर्म का पालन करना चाहते हैं?

धर्म

इस दुनिया में ऐसी भी जगहें हैं जहां औरतें खरीदी बेची जाती हैं क्योंकि धर्म कहता है कि मर्दों के लिए औरतें किसी जिंस की तरह एक संपत्ति ही हैं। क्या सच में आप ऐसे धर्म का पालन करना चाहते हैं?

धर्म

केल्टिक और अमरीका के मूल निवासियों की आध्यात्मिकता पर मुग्ध हैं? उनकी रक्तपिपासु क्रूरता पर भी गौर करें!

ध्यान

मैं ध्यान साधना को बिल्कुल अलग दृष्टि से देखता हूँ। मैं नहीं समझता कि इसके लिए आपको पद्मासन लगाकर ही बैठना होगा, आँखें बंद करनी होंगी और गहरी सांसें ही लेनी होंगी। ध्यान का अर्थ है कि आपकी चेतना सदा वर्तमान में उपस्थित रहे, अतीत या भविष्य के बारे विचार स्थगित रखते हुए आपको बोध होना चाहिए कि आप उस क्षण क्या कर रहे हैं, कर भले ही कुछ भी रहे हों!

ध्यान

क्या आप ध्यान को किसी प्रतियोगिता की तरह समझते हैं? जो ध्यान लगाकर सबसे ज्यादा समय तक बैठ सकता है वह जीता! ऐसा व्यक्ति इस प्रतियोगिता में दूसरों से पहले ज्ञान प्राप्त कर लेगा या उसे ज्ञान प्राप्त हो चुका है! जो आधा घंटा भी एक मुद्रा में नहीं बैठ सकते वे तो अभी शुरुआत कर रहे हैं, हार चुके हैं, भौतिकवादी हैं और आध्यात्मिक व्यक्ति हैं ही नहीं!

ध्यान

क्या आप ध्यान साधना की अवधि से किसी की चेतना के स्तर को नाप सकते हैं?

गुरु

वे समर्पण कर देते हैं। यह बहुत आसान है और यह समाज में अच्छा भी माना जाता है! यह घोषणा करते हुए वे गर्व से भर उठते हैं: "मैंने सर्वस्व परित्याग किया है, मैं उपासना में लीन हो गया हूँ, मैं भक्त हूँ और सिर्फ वही करता हूँ जो मेरे गुरु की वाणी मुझसे करवाती है। मैं कुछ भी नहीं हूँ।" यह विनम्रता ही उनसे अपेक्षित है। उनसे कहा गया है कि 'अपने अहं को खत्म करो' अन्यथा गुरु आपकी ज़िम्मेदारी नहीं ले सकता। आपके कर्मों कि ज़िम्मेदारी वह तभी लेगा जब आपके कर्मों पर उसका अधिकार होगा।

जिम्मेदारी

मैं एक लेखक की हैसियत से, एक व्यापक रूप से लागू हो सकने वाली बात कहता हूँ, जैसे ईमानदार होना एक अच्छी बात है, यह आप की ज़िम्मेदारी है कि आप उस सलाह का किस तरह उपयोग करते हैं। अगर आप मेरी सलाह पर ईमानदार होने का निर्णय करते हुए अपने बॉस से कहते हैं कि आप उसे पसंद नहीं करते और परिणामस्वरूप कोई सज़ा पाते हैं, तो मैं नहीं समझता कि मैं इसके लिए ज़िम्मेदार हूँ!

धर्म

मनुष्य के इतिहास में पहले भी कई धर्म मृत्यु को प्राप्त हुए हैं और आज के धर्म भी समय आने पर इतिहास के पन्नों में दफन हो जाएंगे।

धर्म

धर्म वर्तमान समय में एक पुरातनपंथी विचार है क्योंकि हमने उन सवालों के उत्तर खोज लिए हैं जिनके कारण पहले-पहल धर्म की स्थापना की गई थी। ऐसे विश्वासों को पकड़कर बैठने की हमें क्या ज़रूरत है जो हमें और कुछ नहीं दे सकता? आदिम, बर्बर धर्मग्रंथों के साथ सिर्फ धूर्तता और डर ही बचे रह गए हैं इसलिए चाहे कोई भी धर्म हो, उसे भूत के अवशेष समझकर दफना दिया जाना ही उचित होगा।

धर्म

मैं नहीं मानता कि धर्म पहले कभी अच्छा रहा था। इसके विपरीत, मैं विश्वास करता हूँ कि धर्म की स्थापना ही इसलिए की गई थी कि लोगों पर कुछ निहित स्वार्थी तत्वों का नियंत्रण कायम किया जाए, और इस बात को मैं अच्छा कैसे मान सकता हूँ? उस समय जब धर्म की स्थापना की गई, लोग समझ में न आने वाली चीजों से डरते थे। धार्मिक और स्वार्थी लोग उनके सामने उन रहस्यमय बातों का स्पष्टीकरण प्रस्तुत करते थे और इस तरह उनके अज्ञान और डर को उनके गले की जंजीर और पट्टा बनाकर उन पर अपना शिकंजा कसने में कामयाब होते थे। यह न तो पावन कर्म है न उससे लोगों का कोई भला होता है।

प्रसन्नता

हर व्यक्ति को अपनी प्रसन्नता की जिम्मेदारी खुद लेनी होती है, और वैसा ही आचरण करना पड़ता है जोकि उन्हें प्रसन्नता दे. यदि आप हमेशा सभी को प्रसन्न करने का प्रयास करेंगे तो न तो उसमें सफल हो पायेंगे बल्कि अपने आनन्द और प्रसन्नता को भी नष्ट करेंगे! यह सच है कि आप सबको खुश रखना चाहते हैं, लेकिन दूसरों की खुशी को अपनी खुशी से ज़्यादा महत्वपूर्ण न मानें अन्यथा आप स्वयं खुश नहीं होंगे और फिर दूसरों को भी खुश नहीं कर पाएंगे!

यौन क्रिया

मुझे विश्वास है कि स्वच्छंद प्रेमसंबंधों की अवधारणा मूलतः मानव स्वभाव के अनुकूल नहीं है। यदि आप सेक्स सम्बन्धों को लंबे समय तक जारी रखते हैं तो वहां भावनात्मक लगाव पैदा होता है, और यही ईर्ष्या का कारण बनता है। आप जिसे दिलोजान से चाहते हैं, वह किसी और के साथ सोने लगे तो आपको जलन होना स्वाभाविक है।

अन्धविश्वास

जिस बात को लोग एक ज़माने से मानते आए हों उसमें विश्वास करना एक प्रकार का सामूहिक निर्णय होता है। हर कोई यह मानता है कि यह एक परम्परा है और एक मामूली सी बात है। इस पर कभी कोई प्रश्नचिन्ह नहीं लगाया गया और अग़र किसी ने प्रश्न किया भी तो उसे यह कहकर चुप कर दिया कि 'इसमें शक़ की कोई गुंजाइश नहीं है हम तो इसी बात में विश्वास करते हैं।' हमेशा इस प्रकार की बातों पर सवाल खड़ा करें, अधिकांशतः ऐसी बातें गलत होती हैं!

यौन क्रिया

जब दो व्यक्ति मिलते हैं, और सेक्स करने का निर्णय लेते हैं और अगले दिन दूसरा निर्णय लेते हों किसी अन्य व्यक्ति के साथ सोने का तो यह उनका व्यक्तिगत मामला है बशर्ते कि वे ऐसा करके अपने किसी और साथी को धोखा न दे रहे हों। बेहतर होगा कि वे ऐसा करते हुए कंडोम का इस्तेमाल करें ताकि बीमारियों से सुरक्षित रहें।

स्वतंत्रता

यदि आप मानते हैं कि 'एक रात की हमबिस्तरी', 'स्वच्छंद प्रेमसंबंध', 'समलैंगिकता' नैतिक तौर पर ग़लत है तो आप ऐसा सोचने और मानने के लिए स्वतंत्र हैं। कोई आपको समलैंगिक बनने के लिए बाध्य नहीं कर सकता परन्तु आप भी दूसरों की स्वतंत्रता नहीं ख़त्म कर सकते, अपने नैतिकता के विचारों को किसी पर थोप कर और यह बता कर कि क्या सही और क्या गलत है!

यौन क्रिया

यदि आप सोचते हैं कि जिस व्यक्ति के साथ लंबे समय तक संबंध रखना हो उसी के साथ सेक्स संबंध बनाने चाहिए तो उसी तरह का व्यवहार करें। ऐसे व्यक्ति के साथ सेक्स संबंध न बनाएं जो आपसे शादी करने या बच्चे पैदा करने की मंशा नहीं रखता है। बाद में किसी पर दोषारोपण करने का कोई औचित्य नहीं है!

यौन क्रिया

समानता का अर्थ यह नहीं है कि आप महिलाओं को तो पूरी छूट दें और पुरुषों पर बंदिशें लगाएं, आरोप लगाएं और उनकी आलोचना करें।

यौन क्रिया

अपनी मित्रता को बचाने के लिए दोस्त के साथ अनौपचारिक सेक्स के बाद अपनी उम्मीदों पर लग़ाम लगाएं!

ईश्वर

ना तो किसी को धोखा दीजिए ना ही किसी के धोखे में आइए।अपने स्वभाव और ईच्छा के विरुद्ध मत जाइए।जो ऐसा ढ़ोग करते हों कि केवल वे ही परमात्मा की सेवा कर रहे हैं अन्य धर्म नहीं उनके प्रलोभन में आकर दूसरे धार्मिक संप्रदाय में मत जाइए।

यौन क्रिया

स्त्रियों को मानवजाति के तौर पर देखना शुरू कीजिए। उन्हें वैसे परदों की ओट से बाहर निकालिए जो उन्हें कमज़ोर बनाता है। उन्हें ये सिखाना बंद कीजिए कि वे अबला हैं और उनकी इज्जत उनकी जंघाओं के बीच है! हमें बहुत कुछ बदलना है! ये सिद्धांत कि स्त्रियां पुरुषों के अधीन हैं! ये सोच कि स्त्रियां आसान शिकार हैं, कि कौमार्य केवल स्त्रियों का भंग होता है, तथा और भी बहुत कुछ!

धर्मग्रन्थ

समस्या यह है कि ग्रंथों के जरिये धर्म बताता है और संस्कृति व्यवहारिक रूप में यह दिखाती है कि लड़कियों का पालन-पोषण लड़कों से अलग होना चाहिए. लड़कियां उस तरह वांछित नहीं हैं जैसे कि लड़के हैं. लडके के पैदा होने पर बधाई मिलती है और लड़की के पैदा होने पर सांत्वना!

मनोविज्ञान

अगर आपको लगता है कि बलात्कार के लिए वस्त्र ज़िम्मेदार है तो बताइए कि दो साल की इन बच्चियों ने ऐसा क्या पहना था जिससे वे इतने उत्तेजित हो गए कि उनका बलात्कार करने के अलावा उन्हें कुछ और सूझा ही नहीं? वे कहां गए थे, किस बार में, कौन-से डिस्को में?

यौन क्रिया

एक आम भारतीय व्यक्ति आपको कहेगा कि शादी के पहले यौन सम्बन्ध बनाना गलत है. वो यह सोचते हैं कि सेक्स एक गन्दी चीज है भले ही आप शादीशुदा भी क्यों न हो, और शादी के पहले तो ये पाप ही है!

ईमानदारी

तब भी ईमानदार रहें जबकि आपको पता है कि सामने वाला व्यक्ति आपके उत्तर से प्रसन्न नहीं होगा!

मौन

नाखुश कर देने वाले उत्तर से मौन रहकर बचा जा सकता है.

झूठ

किसी को प्रसन्न करने के लिए झूठ न बोलें!

अन्धविश्वास

कुछ लोग काली बिल्ली को दुर्भाग्यशाली मानने वाले अन्धविश्वास की तो हंसी उड़ाते हैं परन्तु यदि कोई ज्योतिषी उनकी कुण्डली देखकर अशुभ दिन के विषय में चेतावनी दे तो उसे बड़ी गंभीरता से लेते हैं.

यौन क्रिया

एकाधिक व्यक्तियों से यौन सम्बन्ध सच में चल नहीं पाते. यदि आप सच में ही किसी को प्रेम करते हो तो आपको इर्ष्या होगी ही आप उसे रोक नहीं सकते. यदि आप अपने साथी को प्रेम करते हो तो यह असंभव है.

यौन क्रिया

यह संभव नहीं है कि आप कई लोगों से एक साथ प्रेम और यौन सम्बन्ध भी रखें और ईर्ष्यालु भी न हों!

अन्धविश्वास

भारत में वैज्ञानिक विज्ञान पर भरोसा नहीं करते बल्कि सफलता के लिए ईश्वर का मुंह ताकते हैं. अशुभ नम्बरों को त्याग दिया जाता है. डाक्टरों को नज़र लगने से डर लगता है. ये लोग साक्षर तो हैं परन्तु शिक्षित नहीं.

अन्धविश्वास

भारत में अकसर डाक्टर के क्लीनिक के मुख्य दरवाजे पर बुरी नज़र से बचने का प्रतीक चिन्ह देखेंगे. अस्पताल में आप बोर्ड देखेंगे 'हम सेवा करते हैं, वो ठीक करता है'. कितने ही डाक्टर गुरुवार को काम नहीं करते क्योंकि वो मानते हैं कि ये अच्छा दिन नहीं होता और आपको फिर से डाक्टर के पास जाना पड़ेगा. अन्धविश्वासी लोग दवा और इलाज को भी अन्धविश्वास के घेरे में ले आते हैं.

अन्धविश्वास

कई खिलाड़ी लोग मानसिक भ्रांतियों पर निर्भर हो जाते हैं. जैसे कि उनकी योग्यता से नहीं बल्कि बस में किसी निश्चित सीट पर बैठने से वो जीतते हैं, या फिर ये दस्ताने उनके लिए भाग्यशाली हैं, जिनसे उन्होंने गेंद को लपका था न कि उनकी बढ़िया नज़र, सही जगह अथवा प्रशिक्षण जो उन्होंने लिया.

अन्धविश्वास

अन्धविश्वासी लोग खुद पर और अपनी योग्यता पर भरोसा नहीं करते, वो ये नहीं सोचते कि ये पैसा और सफलता उन्हें उनके कार्य और योग्यता से मिला है बल्कि वो यह सोचते हैं कि इसके पीछे कुछ रहस्यमय शक्तियां काम कर रही हैं. निश्चित रूप से यह उनके अन्दर असुरक्षा की भावना उत्पन्न करता है कि पता नहीं कब उनका भाग्य रूठ जाये, इसलिए वो सफलता के लिए अन्धविश्वासी बने रहते हैं.

अन्धविश्वास

औसत मध्यमवर्गीय व्यक्ति और भी खुश रह सकता है यदि वो अपना जीवन धर्म और अन्धविश्वास के बगैर गुजारे.

अन्धविश्वास

अन्धविश्वासी व्यक्ति का पूरा जीवन अन्धविश्वास की जकड़ में रहता है. मजेदार बात तो ये है कि उन्हें स्वयं इस बात का अंदाज नहीं होता परन्तु जो अन्धविश्वासी नहीं हैं उन्हें ऐसा लगता है कि ये खिसका हुआ है.

अन्धविश्वास

अन्धविश्वासी लोग अपनी स्वतंत्रता नष्ट कर लेते हैं. वो अपनी मर्जी से कोई निर्णय नहीं ले सकते क्योंकि उन्होंने अपने दिमाग को अन्धविश्वास के जेल में बंद कर रखा है. उन्होंने अपनी बुद्धि को अन्धविश्वास के हाथों बेच दिया है नहीं तो वो अपनी जिन्दगी अन्धविश्वास के बिना और प्रसन्नता से गुजार सकते थे.

अन्धविश्वास

भारत में लोग विश्वास करते हैं कि चेचक देवी माता का प्रकोप है और दवा इत्यादि से आप इसका कुछ नहीं कर सकते| केवल प्रार्थना और कर्मकाण्ड करिए देवी माता की शांति के लिए!

अन्धविश्वास

बहुत से डाक्टर अपना क्लीनिक गुरुवार को अन्धविश्वास की वजह से बंद रखते हैं. बहुत से डाक्टर और लोग ये सोचते हैं कि गुरुवार को डाक्टर के यहाँ जायेंगे तो दुबारा फिर जाना पड़ेगा! वो चिकित्सा विज्ञान की पढाई करते हैं, शरीर, रोगों तथा उनके इलाज के विषय में जानते हैं परन्तु यह सब उन्हें इस अन्धविश्वास से नहीं बचा पाता कि गुरुवार एक बुरा दिन है.

सकारात्मकता

किसी को नकारात्मकता के गहरे कुएं में गिरने से बचाने के लिए एक सकारात्मक दृष्टिकोण सहायक हो सकता है.

ईश्वर

दुर्घटना होने के बाद कुछ लोग यह सोचते हैं कि यह उनके पाप कर्मों की वजह से हुआ, परन्तु ईश्वर ने उनकी जान बचा दी. अच्छा तो उसने आपकी जान बचा दी पर हड्डियाँ टूट गईं, अगर वो आपको मरने से बचा सकता था तो आखिर हड्डियाँ टूटने से क्यों नहीं? क्या वो बहुत व्यस्त था? या फिर उसने यह सोचा कि यह वास्तविक नहीं लगता कि दुर्घटना हो और कुछ टूटे फूटे भी नहीं? और या फिर उसने यह सोचा कि तुमने कुछ पाप तो जरूर किये हैं जो तुम्हारे मरने के लिए पर्याप्त नहीं हैं परन्तु कम से कम कुछ हड्डियाँ तो जरूर टूटनी चाहिए.

ईश्वर

लोग कहते हैं कि जो बच्चे भूख से मर जाते हैं यह उनके कर्मों का फल है, उन्हें इसे भोगना ही पड़ेगा और ईश्वर को उन्हें नहीं बचाना चाहिए! आखिर ईश्वर इतना पक्षपाती क्यों है कि वो कुछ लोगों को तो उनके कर्मों से बचा लेता है पर कुछ को नहीं?

ईश्वर

कर्म का दर्शन और ईश्वर दोनों एक साथ नहीं चल सकते. यदि आप अच्छी बातों के लिए ईश्वर को जिम्मेदार मानते हैं, तो फिर कर्म को बुरी बातों के लिए दोष कैसे दे सकते हैं? क्या फिर ईश्वर ही जिम्मेदार नहीं है सभी अच्छे बुरे और आपके कर्मों के लिए भी?

धर्म

धर्म का लचीलापन बड़ा मजेदार होता है, आप जो चाहे बकवास करो, अपनी बात को सिद्ध करने के लिए आपको निश्चित रूप से धार्मिक तर्क मिल ही जायेंगे.

ईश्वर

बहुत से लोग कहते हैं कि वो ईश्वर और उसके विधान में विश्वास करते हैं परन्तु यदि आप कुछ पाना या जिन्दगी में कुछ करना चाहते हैं तो आपको खुद कदम उठाना पड़ेगा! बैठे रहने और विश्वास कर लेने से कुछ नहीं होगा| विश्वास छोड़ो, उठो और असल दुनिया में हाथ पैर चलाओ!

यौन क्रिया

नैतिकता के मानदंड दूसरों के लिए स्वयं से अधिक न स्थापित करें!

आशा

यदि आपके पास आशाएं, सपने और अपेक्षाएं नहीं है तो आप प्रसन्न नहीं होगे| सपने देखिये, आशाएं करिए और अपनी कल्पनाओं को उड़ने दीजिये पर साथ ही अपने सपनों को सच करने के लिए अपने दिमाग और हाथ पैर का प्रयोग करिए|

अपेक्षा

अपेक्षाएं करना बंद मत करिए परन्तु निराशाओं से सबक जरूर लीजिये!

धन

नहीं, पैसा ही सब कुछ नहीं है और आप हर चीज की कीमत यूरो, डॉलर और रुपये में नहीं आँक सकते!

गुरु

आखिर गुरु ऐसा क्यों प्रदर्शित करते हैं कि वो ईश्वर की तरह अन्तर्यामी हैं?

गुरु

आखिर गुरु ऐसा क्यों चाहते हैं कि आप अपने दिमाग से सोचना बंद कर दें और उनका अन्धानुकरण करें?

गुरु

सावधान हो जाइएगा, अगर कोई गुरु कहे कि आप अपना मोबाइल उसकी फोटो के सामने रख के चार्ज कर सकते हैं!

मित्र

घनिष्ठ मित्रता में दो अलग अलग स्वभाव के व्यक्ति एक दूसरे को प्रेम करते हैं परन्तु साथ ही उनकी मान्यताएं और जीवन के प्रति नजरिया अलग हो सकता है|

प्रेम

नहीं, आप ईश्वर को उतना प्रेम भी नहीं कर सकते जितना अपने परिवार को करते हैं! भला आप कैसे कर सकते हैं? वो कोई आपके माँ बाप की तरह नहीं है, जो आपको अपनी गोद में और बाहों में लेकर सुरक्षा और प्रेम का अहसास कराये| आपके माँ की खुशबू, उसकी आवाज, उसका स्नेह भरा स्पर्श आपके दिलोदिमाग में बसा हुआ है| यह असंभव है कि आप कभी भी उतना प्रेम ईश्वर से कर पायें जितना कि अपने परिवार से करते हैं|

प्रेम

आप ईश्वर को विशुद्ध प्रेम नहीं कर सकते, उसमें या तो भय होगा अथवा लालच| ईश्वर से सम्बंधित इस प्रकार की भावनाएं मन में बैठा दी जाती हैं| ईश्वर देख रहा है अगर तुम गंदे बच्चे हो तो! ईश्वर अन्तर्यामी है दूसरों से लड़ो मत और झूठ मत बोलो! अगर कुछ पाना चाहते हो तो अच्छे बनो और जो ईश्वर कहता है वह करो! शिक्षित करने के लिए अभिभावक ईश्वर का प्रयोग करते हैं - या तो उसका नाम लेकर डराते हैं या फिर लालच देते हैं कि वो तुम्हें इनाम देगा|

प्रेम

धर्मग्रन्थ गलत कहते हैं कि ईश्वर का प्रेम दिव्य है और परिवार के प्रति आपका प्रेम मोह है|

धर्मग्रन्थ

यदि आप अन्धविश्वासों से भरे शास्त्र बार बार पढेंगे तो आप ये विश्वास करने लग जायेंगे कि यह सच है| संयोग और आपके शक उस अन्धविश्वास को दृढ करते हैं|

ईश्वर

धर्म की स्थापना तब हुई जब लोगों ने तथाकथित ईश्वरीय शक्ति के चारों तरफ नियम गढ़ने शुरू किये, जिससे कि वह लोगों को भयभीत और भ्रमित कर सकें| उन्होंने अपने अपने ईश्वर गढ़े और दुनिया की जनसँख्या को विभिन्न समूहों में बाँट दिया|

धर्म

"मैं अन्धविश्वासी नहीं धार्मिक हूँ", यह असंभव है, क्यों कि धर्मग्रन्थ अन्धविश्वास से भरे पड़े हैं| आप अन्धविश्वास को धर्म से अलग नहीं कर सकते, ये उसका स्रोत है| फिर भी यह एक अच्छा लक्षण है कि आपने यह सोचना शुरू कर के पहला कदम तो उठाया|

ईश्वर

कई धर्मों के धर्मग्रन्थ कहते हैं कि ईश्वर बुद्धि और तर्क से परे है| आप उसे बहस करके नहीं जान सकते, तो फिर ऐसी कोशिश ही क्यों करते हो?

अनुभव

आपके 'अन्दर की आवाज' आपकी भावनाओं और अनुभव का योग है, क्या उचित होगा, यह बताने के लिए अवचेतन मन का तरीका है, इसमें कुछ भी अलौकिक नहीं है|

ईश्वर

बलात्कार जैसी भीषण दुर्घटना के बाद ईश्वर का विश्वास दिलासा देने वाला नहीं होता|

जिम्मेदारी

अपने व्यवहार और सोच में कोई बदलाव न करके, गैर जिम्मेदार लोगों के लिए, कई मायनों में भाग्य का दर्शन जीवन में हुई दुर्घटनाओं को स्वीकार करने का सबसे आसान उपाय है|

जिम्मेदारी

भाग्य का दर्शन अपनी जिम्मेवारियों से भागने का सबसे सरल उपाय है|

धर्म

आप हिन्दू धर्म को जैसे चाहें मोड़ सकते हैं, आप जो चाहें वो इक्षा कर सकते हैं, स्वर्ग या मुक्ति - ये इतना लचीला है कि आपको सब कुछ दे सकता है|

धर्म

मुक्ति या स्वर्ग? कर्म अथवा भाग्य के दर्शन से हिन्दू धर्म लोगों को भ्रमित करता है|

धर्म

क्या यह सबसे अच्छा नहीं होगा कि हम सब इंसान बनें और धर्म के ठेकेदारों को लोगों को मूर्ख बनाकर पैसा न कमाने दें|

धर्म

यदि आप हिन्दू धर्म के मूल स्वरुप में विश्वास करते हैं तो आप धर्म परिवर्तन नहीं कर सकते| या तो आप हिन्दू पैदा होते हैं अथवा आप हिन्दू नहीं हैं| यदि आप किसी गुरु या संप्रदाय के अनुयायी हैं तो आप हिन्दू आधारित संप्रदाय के सदस्य हैं पर हिन्दू नहीं|

गुरु

अपने धन्धे के लिए गुरुओं ने हिन्दू धर्म में धर्म परिवर्तन संभव कर दिया!

धर्म

हर किसी ने धर्म को अपनी सुविधानुसार बदला, व्याख्या करी और परम्पराएँ चलाई, धर्म और ईश्वर को बेचने के लिए|

धर्म

क्या यह अजीब नहीं है कि यदि एक सामान्य व्यक्ति सार्वजनिक रूप से अपने गुप्तांगों का प्रदर्शन करे तो वह नाराज़गी का कारण हो सकता है, परन्तु यही काम एक धार्मिक व्यक्ति करता है तो उसे प्रसिद्धि और प्रशंसा मिलती है|

धर्म

साधु या सन्यासी का मतलब जिसमें वैराग्य हो| सोना चाँदी और धन का प्रदर्शन करने वाले आजकल के विरोधाभासी साधु कलंक हैं साधु के नाम पर|

गुरु

सोने के सिंहासनों पर बैठने वाले, चाँदी के बर्तनों को प्रयोग करने वाले, हीरा जवाहरात और सोने के गहने पहनने वाले गुरु बस यही प्रदर्शन करते हैं कि धर्म एक व्यवसाय के अलावा और कुछ भी नहीं है|

धर्म

पुण्य वह काल्पनिक धन है, जिसके द्वारा आप स्वर्ग आदि काल्पनिक सुखों को खरीद सकते हो!

धर्म

गंगा में डुबकी लगाने से सारे पाप धुल जाते हैं! कितनी बढ़िया बात है, फिर तो चाहे जितने पाप करो और गंगा जाकर सब धो लो!

धर्म

धर्म बच्चों के जीवन को बर्बाद कर देता है!

धर्म

युद्ध, भ्रष्टाचार, धोखाधड़ी, लालच और अमर होने की इक्षा ने कुम्भ मेले की रचना करी|

भय

धार्मिक लोग भय की वजह से धर्म को मानते हैं कि हो सकता है कि धर्म सही हो और वो सच में ही नर्क में जा सकते हैं| वो शुरुआत से ही भयभीत होते हैं और धर्म उनके डर को और भी बढ़ा देता है कि धर्म के रास्ते पर चलकर ही आप नर्क की यातनाओं से बच सकते हो|

भय

कितना भयानक होगा वह ईश्वर जो लोगों को प्रसन्न रखने की जगह डरा धमका कर रखना चाहता है| परन्तु ईश्वर भय को बढ़ावा देना उनके लिए अच्छा है जिनके जीवन का उद्देश्य दूसरों के भय का लाभ उठाना है|

भय

जो यह कहते हैं कि मैं भगवान के अलावा और किसी से नहीं डरता, असल में उसका मतलब होता है कि वह हर चीज से भयभीत रहते हैं|

भय

केवल बच्चे ही भूतप्रेत में विश्वास नहीं करते और डरपोक होते बल्कि धर्म ने परिपक्व आदमी के मन में भी भय बैठा दिया है, क्योकि यह भय वश में करने और दिग्भ्रमित करने में सहायक होता है| भूतप्रेत की कहानियाँ हैं और उनके खतरों से बचने के लिए धार्मिक कर्मकाण्ड और उपचार मौजूद हैं|

भय

शास्त्र और धर्म बच्चों तथा बड़ों में जादू टोने और भूत प्रेत का भय स्थापित करते हैं|

जिम्मेदारी

विदेशी संस्कृति और पाश्चात्य सभ्यता तथा औरत के पहनावे को यौन अपराधों का कारण वाला राग अलापने वाले सभी भाईसाहबों का पैंट शर्ट उतरवा लिया जाये क्यों कि यह पहनावा भी विदेशी संस्कृति का है|

यौन क्रिया

भारत में सेक्स, शराब और जुए के लिए पश्चिमी संस्कृति जिम्मेदार नहीं है!

यौन क्रिया

सम्पूर्ण भारत के मन्दिरों में कामुक मूर्तियों का चित्रण करने वाले इंजीनियर और कारीगर पश्चिमी देशों से नहीं आये थे, वो भारतीय थे| अतः पश्चिम के ऊपर यौन उन्मुक्त होने का दोषारोपण मत करिए, यह भी प्राचीन भारतीय संस्कृति का ही हिस्सा है|

जिम्मेदारी

भारत की समस्याओं के लिए पाश्चात्य संस्कृति को दोष देने से यौन अपराध रुक नहीं जायेंगे!

सत्य

अपने प्रेम और ईमानदारी में सत्य को खोजें, वह बाहर कहीं नहीं है, आपके अन्दर ही मिलेगा|

धर्म

धर्म औरत को कहता है कि वह अपने सिर तथा चेहरे को घूँघट या बुरके में छिपा कर रखे, क्योंकि आदमी उसके चहरे को देखकर योनि की कल्पना करके उत्तेजित हो सकता है|

धर्म

भारत का पुरुष प्रधान धर्म और संस्कृति न केवल लड़की का पालन पोषण इस तरह करते हैं कि वो कमजोर बने बल्कि पुरुषों द्वारा किये गए अपराध के लिए भी उसे ही दोषी ठहराते हैं|

धर्म

स्त्री के प्रति यौन अपराधों की जड़ धर्म ही है|

धर्म

बहुत से धर्म कहते हैं कि औरत पीटा जा सकता है, जैसे चाहे वैसे उपयोग किया जा सकता है और दान भी किया जा सकता है|

धर्म

धर्म औरत को अपवित्र और भोग की वस्तु बनाता है और कहता है कि ये दोयम दर्जे की नागरिक हैं, जोकि आदमी की जागीर हैं और उन्हें आज्ञाकारिणी होना चाहिए|

मनोविज्ञान

केवल बलात्कारिक मानसिकता ही बलात्कार के लिए स्त्री के वस्त्र और व्यवहार को दोष दे सकती है|

उपचार

समय आपके सारे दुख-दर्द हर लेगा, उसे अवसर दीजिए|

धर्म

हिन्दू धर्म कहता है कि अगर गलत समय पर मरे तो परिवार के पांच लोग और भी मरेंगे|

धर्म

धार्मिक मान्यताएं और अन्धविश्वास आपके मित्रों की भावनाएं आहत कर सकता है|

प्रसन्नता

स्वयं की बहुत अधिक तुलना करके अपनी प्रसन्नता को न खोएं!

व्यक्तिगत

मैं केवल अपने घर में ही नहीं बल्कि अपने जीवन में भी उनका स्वागत करता हूँ, जिनकी या तो कोई अपेक्षा नहीं है, अथवा जिनकी अपेक्षाएं मैं पूरी कर सकता हूँ| मैं अपने जीवन में वो लोग चाहता हूँ, जो मेरी भावनाओं का सम्मान करें और अपनी तथा मेरी प्रसन्नता का ध्यान रखें| इसके लिए मैंने अपने दिल के दरवाजे पर एक फिल्टर लगा रखा है कि केवल वही लोग प्रवेश करें, जिन्हें मैं प्रसन्न रख सकता हूँ और जो मुझे प्रसन्न रखें|

भावनाएँ

मनुष्य ने आधुनिक जीवन पद्धति के लिए अपनी संवेदनशीलता को बेच दिया|

भावनाएँ

लोग न तो अपनी भावनाओं के प्रति संवेदनशील हैं और ना ही दूसरों की भावनाओं के प्रति, आज के समय का सबसे बड़ा नुक्सान यही है: संवेदनशीलता का अभाव|

प्रसन्नता

जो आपको उचित लगता है वह करें, इससे आप प्रसन्न रहेंगे|

मनोविज्ञान

सबकुछ अपने वश में करने का प्रयास न करें|

धर्म

केवल उनसे ही बात न करें जोकि आपको धार्मिक बातें बताते हैं बल्कि उनसे भी चर्चा करें जिन्होंने स्वेच्छा से धर्म पर विश्वास न करने का निर्णय लिया| प्रयोग के तौर पर धर्म को उसकी आँख से देखें जिसने इसका त्याग कर दिया|

धर्म

आस्तिकों को अपनी मान्यताओं और धर्म का अध्ययन करना चाहिए, जरा गहराई से देखें कि शास्त्रों में क्या लिखा है, और यदि कुछ आपको नागवार गुजरता है तो आप खुद से पूछें कि क्या आप इस पर आँख बंद करके विश्वास कर सकते हैं जैसा कि धर्म आपसे करने को कहता है?

धर्म

क्या सच में हर नास्तिक इतना नासमझ होता है कि धर्म को समझ न सके?

जिम्मेदारी

प्रिय अविवाहित भारतीय युवाजन, अपने जीवन के निर्णय स्वयं करें| आपको अपने विवाह की जिम्मेदारी स्वयं लेनी चाहिए, अपने अभिभावकों को आप हमेशा अपने जीवन के लिए दोष नहीं दे सकते|

सम्बन्ध

नियोजित विवाह से आपको उस व्यक्ति के जीवन में तो जगह मिल जाती है फिर भी यह सवाल बना रहता है कि उसके दिल में भी आपके लिए जगह है या नहीं? और इसे आप नियोजित नहीं कर सकते|

जिम्मेदारी

सभी की जिम्मेदारी अपने कन्धों पर मत लीजिये| आपके कंधे न तो सबकी जिम्मेदारी लेने के लिए बने हैं और न ही आप लम्बे समय के लिए इसे ले पाएंगे! प्रसन्न रहें, जिससे आपको और बाकी सबको भी लाभ होगा|

जिम्मेदारी

यदि आप दूसरों की जिम्मेदारी लेते हो तो अक्सर वो व्यक्ति स्वयं कुछ करने के बजाय आपके ऊपर निर्भर हो जाता है| इससे न तो आपको कुछ लाभ होगा और न ही उसे|

ग्लानि

दूसरों के लिए ग्लानि करने से उनका कुछ भला नहीं होगा|

धर्म

धार्मिक व्यापारी सोचते हैं कि भगवान और उसके भक्तों को धोखा देकर, गलत काम करके पैसा कमा सकते हैं, और फिर उसी पैसे से भगवान को घूस देकर पापों से मुक्त हो सकते हैं| धर्म आपको सब कुछ माफ़ कर देने की संभावना प्रदान करता है|

धर्म

धार्मिक परम्पराओं के नाम पर ईश्वर और उसके भक्तों को धोखा देना बहुत ही आसान है|

प्रेम

प्रेम की बातें करना और किसी के प्रेम में पड़ जाना, दो अलग अलग बातें हैं| याद है आपको, जब आपने पहली बार किसी से प्यार किया था, कितने प्रसन्न थे आप और मुस्कुराना नहीं रोक पा रहे थे? :)

धर्म

क्या पागलपन है? धर्म किस तरह व्यक्ति की बुद्धि को भ्रमित करता है! बार बार लोगों से यह कहते रहो कि यह भगवान की इक्षा है, तो वो एक दिन इस पर विश्वास करने ही लगेंगे|

मित्र

जब सभी औपचारिकताएं समाप्त हो जाती हैं तब समझियेगा की प्रेम और मित्रता घनिष्ठ है|

प्रेम

प्रेम प्रदर्शन की वस्तु नहीं है, परन्तु जिसे आप प्यार करते है उससे प्यार का इजहार तो करना ही चाहिए| क्या आपको अच्छा नहीं लगता, जब कोई आपसे कहे या आप किसी से कहें कि "मैं तुम्हें प्यार करता हूँ"?

धर्म

अपने को ऊँची जाति का हिन्दू समझने वाले लोग दलित को दोयम दर्जे का नागरिक और अछूत समझते हैं, जरा कल्पना करिए कि यदि आप दलित के घर पैदा हुए हैं तो क्या आप हिन्दू होना पसन्द करेंगे? क्या आप ऐसे धर्म से प्रसन्न होंगे या गर्व करेंगे?

मान्यताएं

एक स्त्री ने बच्चे को जन्म दिया, प्रकृति का सबसे बड़ा चमत्कार और भारतीय अन्धविश्वास उसे उस समय अपवित्र कहता है, कितना गन्दा मजाक है ये!

मान्यताएं

स्कूल या विश्वविद्यालय में एक विषय के रूप में विज्ञान की पढाई करना अलग बात है और वैज्ञानिक दृष्टिकोण रखना दूसरी बात| लोग उच्च शिक्षा प्राप्त कर सकते हैं परन्तु अन्धविश्वासों को मान्यता देना उन्हें पढ़ा लिखा मूर्ख साबित करता है|

धर्मग्रन्थ

धर्मग्रन्थ ही प्रमुख रूप से अन्धविश्वास की रचना के लिए दोषी हैं|

मान्यताएं

यदि आप ये जानते हैं कि यह असम्भव है, फिर भी उस पर विश्वास करते हैं तो या तो आप वास्तविकता के समक्ष अपनी आँखें बंद कर रहे हैं, या फिर आप मूर्ख हैं| इस प्रकार या तो आप स्वयम को और दूसरों को धोखा देते रहेंगे अथवा अंत में निराश होंगे|

आशा

आशावान होना सदा ही अच्छा है तथा सकारात्मक दृष्टिकोण का परिचायक है| परन्तु असम्भव के ऊपर विश्वास करना या तो वास्तविकता से मुंह मोड़ना है या फिर मूर्खता|

आध्यात्मिक

आज की आधुनिक आध्यात्मिकता का सबसे खतरनाक पहलू यह है कि कोई भी अपने मन से कुछ भी बनाकर सत्य के नाम पर बेच सकता है, भले ही वह पूरी तरह से असम्भव व अप्राकृतिक हो|

क्रोध

यदि आप यह विश्वास करते हैं कि पिटाई से सुधार संभव है तो आपको स्वयम भी यह नियम पालन करना चाहिए, यदि कोई गलती हो जाये तो अपने आप को अपने से जादा ताकतवर के सामने प्रस्तुत कर देना चाहिए कि मेरी थोड़ी पिटाई लगा दो तो मैं सुधर जाऊंगा|

आध्यात्मिक

क्या आध्यात्मिकता भी कोई गणित या अर्थशास्त्र की तरह सीखने और पढ़ने की चीज है? क्या आप ऐसा नहीं सोचते कि प्रेम और ईमानदारी से रहना ही सच्ची आध्यात्मिकता है?

धर्म

क्या आपको ऐसा नहीं लगता कि धर्म, सम्प्रदाय अथवा गुरुओं पर विश्वास करने का मुख्य कारण भय और लालच है?

यौन क्रिया

ऑफिशियली, सभी भारतीयों का कौमार्य तबतक सुरक्षित रहता है जबतक कि उनकी शादी न हो जाये|

मनोभाव

इर्ष्या को दूर रखने के लिए पूर्व जीवनसाथी से दूरी रखना आवश्यक है|

धन

परिवार में धन साझा करना जीवन को और आसान बना देता है|

ज्ञान

विद्यालय वो जगह है जहाँ आप सीखना सीखते हो|

सम्बन्ध

ये कोई नियम है क्या कि सम्बन्धों में समस्या होगी ही? क्या यह नहीं हो सकता कि हम सभी प्रसन्न और ठीकठाक रहें?

जीवन

अपने जीवन में आये परिवर्तनों को छिपाने का प्रयास न करें, आपका भूतकाल भी आपका ही एक हिस्सा है|

भक्ति

गलत व्यक्ति अथवा कारण के प्रति समर्पण नुकसानदेह हो सकता है|

सम्बन्ध

नियोजित विवाह एक ऐसा जुआ है, जिसमें यदि आप भाग्यशाली हैं तो आपका जीवनसाथी आपका परम मित्र हो सकता है, अन्यथा आपके पास ऐसा पति या पत्नी है जिसका स्थान आपके जीवन में तो है पर आपके दिल में नहीं|

मित्र

आज के समय में जबकि लोगों के पास अपने लिए भी समय नहीं होता, यदि कोई आपकी मित्रता को मजबूत करने के लिए समय निकाले तो यह बहुत बड़ी बात है, इसकी प्रशंसा करें|

मित्र

अपने मित्रों के लिए समय निकालिए, इससे आपको तथा उन्हें प्रसन्नता मिलेगी|

व्यक्तिगत

किसी को लम्बे समय तक तुम्हारे बिना मत छोड़ो नहीं तो उन्हें तुम्हारे बिना रहने की आदत पड़ जाएगी|

गुरु

ठगने वाले गुरु, अन्धविश्वासी धार्मिक लोगों के लालच से खेलते हैं| वो झूठी सिद्धियों के नाम पर सफलता और धन का लालच लोगों के मन में बढ़ाते है परन्तु वास्तव में वो लोगों से ही पैसा ठगते हैं और इस प्रकार बेशुमार सोना और धन दौलत इकठ्ठी कर के खुद धनी बन जाते हैं|

गुरु

आशीर्वाद देने का धंधा करने वाले गुरु के अनुयायी असल में बहुत डरपोक होते हैं| जो लोग ईश्वर से डरते है उन्हें ऐसा लगता है कि किसी के पास ऐसी शक्ति है कि उसके आशीर्वाद से उसे कुछ नहीं होगा| वो केवल इस प्रकार की निश्चिन्तिता चाहते है| उनका गुरु केवल आशीर्वाद देकर, बिना कुछ किये, भगवान की तरह हो जाता है|

गुरु

कुछ गुरु दो प्राचीन क्रियाओं को मिलाकर एक नयी क्रिया बना देते हैं और कहते हैं कि ये मेरी बनाई हुई है, फिर उसका पेटेंट करा के बेचने लगते हैं|

पहचान

आप किसी और के जैसे नहीं है, अपने अप्रतिम होने का सुख लें|

प्रसन्नता

प्रसन्न और संतुष्ट नहीं हैं? दृष्टिकोण को बदलकर देखें! जीवन सुन्दर है परन्तु इसे सही कोण से देखना पड़ेगा|

ईश्वर

यदि ईश्वर सर्वशक्तिमान है और उसी की मर्जी से ही इस दुनिया में सब कुछ होता है तो आखिर क्यों नहीं वो अपने एक इशारे से ही इस दुनिया शांति स्थापित कर, भूख, गरीबी और बीमारियों को मिटा देता है? हिंसा को दूरकर प्रत्येक व्यक्ति को इतना ज्ञान और दिमाग दे कि इंसान, जनसँख्या विस्फोट और इस धरती को नष्ट किये बिना प्रसन्नता और प्रेम से रह सके|

मान्यताएं

मेरा धार्मिक लोगों से निवेदन है कि यदि कोई आपकी तरह ईश्वर पर विश्वास नहीं करता तो आप ये क्यों नहीं सोच लेते कि आपका ईश्वर ही यह चाहता होगा कि कुछ नास्तिक भी इस धरती पर रहें| आप उनसे क्यों लड़ते और तर्क करते हैं? यदि आपकी रूचि है तो उनकी बात सुनें, अन्यथा उन्हें ऐसे ही छोड़ दें|

मान्यताएं

भगवान को मानने वाले धार्मिक लोग ये विश्वास करते हैं कि ईश्वर की इक्षा के बिना पत्ता भी नहीं हिलता| यदि आप सच में ही ऐसा सोचते हैं तो फिर नाराज क्यों हो जाते हैं, यदि कोई भगवान पर विश्वास न करे तो| ऐसा क्यों नहीं सोचते कि ये भी ईश्वर की ही इक्षा होगी|

व्यक्तिगत

स्वामी का मतलब है मालिक या अंग्रेजी में ओनर| मैंने किसी धर्म या गुरु को मेरा मालिक होने का अधिकार नहीं दिया| मैं अपना मालिक खुद हूँ और इसलिए अपने नाम के आगे स्वामी लिखने में मुझे कुछ भी गलत नहीं दिखाई देता| यदि आपका मालिक भी कोई और नहीं है तो आप भी ऐसा कर सकते हैं|

व्यक्तिगत

मैं न तो आपको ये बताता हूँ कि आप क्या विश्वास करो और न ही आपसे अनुगमन करने को कहता हूँ| मैं भी आपकी तरह एक साधारण इंसान हूँ, जिसकी सोच अपने साथ व अगल बगल होने वाली घटनाओं से प्रभावित होती है|

व्यक्तिगत

जीवन एक निरंतर बदलने वाली प्रक्रिया है और मैं ईमानदारी से वही कहना चाहता हूँ जोकि मैं सोच रहा हूँ| मैं आपको अभी से यह नहीं बता सकता कि आज से पांच साल बाद मैं क्या सोच रहा होऊंगा परन्तु मैं परिवर्तन को स्वीकार करने के लिए तैयार हूँ|

धर्मग्रन्थ

हिन्दू संस्कृति में कन्यादान का बड़ा महत्व है, कन्या को पिता और भाई उसके पति को दान करते हैं| जैसे कि गाय का भी दान होता है या फिर अन्न का| कन्या भी दान करने योग्य वस्तु की तरह ही है उसका अपना कोई अस्तित्व नहीं|

धर्मग्रन्थ

हिन्दू धर्मग्रन्थ कहते है कि औरत को हमेशा रक्षक चाहिए| पहले पिता और भाई फिर पति और बाद में पुत्र| ये धर्म का अन्याय है जोकि औरत को कमजोर और अयोग्य ठहराता है|

गुरु

हर गुरु का शिष्य दूसरे गुरु को ठग तथा उनके उलटे सीधे दावों को बकवास बताता है परन्तु केवल उनका गुरु सच्चा और उसके दावे भी सच्चे|

विश्वास

"मैं आपसे प्रेम करता हूँ" से भी जादा महत्वपूर्ण है, "मैं आपके ऊपर विश्वास करता हूँ"|

ईश्वर

क्या ईश्वर विश्वास करने योग्य है? क्या आपको सचमुच उस पर विश्वास करना चाहिए जिससे कि आप कभी मिले ही नहीं?

ईश्वर

ईश्वर पर से भरोसा उठाने के लिए किसी दुर्घटना का इंतजार क्यों?

मान्यताएं

यदि आप एक बार अपनी मान्यताओं के जाल से बाहर निकल कर देखें तो आपको मालूम पड़ेगा कि उस आज़ादी का अहसास कितना सुखद है जबकि आप स्वयं के द्वारा किये हुए कर्मों और उसके परिणामों कि जिम्मेदारी लेते हैं|

ईश्वर

ईश्वर पर विश्वास करके आप स्वयं को अनहोनी से बचा नहीं सकते!

गुरु

गुरुओं को विद्यार्थी बनाने चाहिए न कि अनुयायी अथवा शिष्य|

गुरु

ये गलत है जब कि गुरु से सीखने की जगह उसकी पूजा शुरू हो जाये, लोग फोटो की पूजा करें, उनके पैर धोकर पीयें, और गुरु अपनी मूर्ति और फोटो बेचें|

वर्तमान

बच्चे पूरी तरह से वर्तमान में रहते हैं|

ईश्वर

मेरे लिए बहुत कठिन है उस ईश्वर पर विश्वास करना जो सातवें आसमान पर है, जो मुझे दिखता नहीं, जो मुझसे बोलता नहीं और जिसे मैं छू नहीं सकता, जो मन्दिरों में सोने चांदी से लदा और फूलों से सजा बैठा है और जिसे कभी कभी चोर भी उठाकर ले जाते हैं और वो कुछ कर नहीं पाता, जो खुद की रक्षा नहीं कर पाता वो भला मेरी कैसे करेगा?

ईश्वर

मुझे नास्तिकों का ईश्वर जादा पसंद है बजाय कि आस्तिकों के| जो कि एक विचार है, एक अच्छा विचार है, मेरे दिल में है और दिमाग में भी, जिसे मैंने खुद बनाया है, गढ़ा है अपनी मनमर्जी के मुताबिक, वो मेरा है इसलिए मुझे उससे प्रेम है और उसपर विश्वास भी|

धर्म

धर्म ने हमेशा एक तानाशाह की तरह लोगों का शोषण किया तथा अपने बनाये हुए कानूनों को मनवाने के लिए भय का प्रयोग किया| तानाशाह क़ानून बनाता है और उन्हें बदलने का कोई उपाय नहीं रखता|

धर्म

धर्म उन सड़े गले कानूनों की तानाशाही है जोकि संशोधित नहीं किये जा सकते|

सत्य

सारे धर्म सत्य को ही स्थापित करने में जुटे हैं, और स्वयं को सत्य बता रहे हैं परन्तु सचाई तो ये है कि वकालत तो असत्य की होती है, सत्य तो सत्य है और जितने धर्म हैं सब वकालत में ही तो लगे हैं|

धर्म

धार्मिक लोग आधुनिक बनने के प्रयास में धर्म और विज्ञान को मिलाने की कोशिश करते हैं क्योंकि धर्म के बिना तो रहा जा सकता है परन्तु विज्ञान के बिना नहीं|

मान्यताएं

सत्य पर विश्वास करना कोई जरूरी नहीं, सत्य तो सत्य है आप विश्वास करो या न करो| अग्नि की सत्यता ये है कि वो जलाती है आप चाहे विश्वास करो या न करो वो तो जलाएगी ही|

मान्यताएं

अक्सर लोग झूठ पर विश्वास करते हैं तभी झूठ का अस्तित्व भी है और झूठ पर तो आपको हमेशा अंधविश्वास ही करना पड़ेगा, क्यों कि यदि आँख खोल ली तो आपको पछतावा होगा|

मान्यताएं

लोग अन्धविश्वासी इसलिए हो जाते हैं क्योंकि ये उनके मनमाफिक और विश्राम देने वाला होता है| मनुष्य का स्वभाव ऐसा है कि वो वही विश्वास करना चाहता है जो कि उसके अनुकूल और सुविधाजनक हो फिर भले ही वो झूठ ही क्यों न हो|

धर्म

वो भक्त लोग जो गुरुओं के साथ सोना पसंद करते हैं, असल में सेक्स की एकरसता से बोर हो गए हैं, तो धर्म के आवरण में लपेटकर नयी फैंटेसी के साथ सेक्स का मजा लेते हैं | भगवान् की भक्ति और सेक्स की मस्ती, एकसाथ डबल मजा|

मान्यताएं

सालों से मन में घर किये हुए विचार कुछ पढ़ लेने या थोड़ी देर बात कर लेने से कैसे मिट सकते हैं? बदलाव तभी आता है जबकि व्यक्ति स्वयं चाहे और तैयार हो|

अनुभव

बहुत अधिक प्रयास किसी को सहमत कराने में न करें, उन्हें स्वयं ही अपने अनुभव करने पड़ेंगे|

धर्मग्रन्थ

धर्म कहता है कि औरत आज्ञाकारी, अधीन और पर्देवाली हो, अन्य धर्मों के लोगों को क़त्ल कर दो और जो नास्तिक हैं वो मरने के पहले और मरने के बाद यातनाएं सहन करते हुए कष्ट भोगेंगे|

धर्मग्रन्थ

हिन्दू और मुस्लिम दोनों ही धर्मों में यदि औरत बात न माने और सेक्स न करना चाहे तो उसे पीटने की सलाह दी गई है|

ईश्वर

जब भी आप ईश्वर को किसी स्थान या कर्मकांड में सीमित करते हैं वहीँ भ्रष्टाचार प्रारंभ होता है, क्योंकि कोई स्थान का मालिक होगा और कोई कर्मकांड बेच रहा होगा|

मनोविज्ञान

इस दुनिया में सब जरूरत का खेल है| यदि आपको ये अहसास हो कि इस व्यक्ति या स्थान को आपकी जरूरत नहीं तो तुरंत उसे त्याग दो और वहां पहुँचो जहाँ आपकी जरूरत हो| परन्तु उसे कभी मत छोड़ो जिसे तुम्हारी जरूरत है| सुख और सम्मान से रहना है तो आवश्यक और उपयोगी बनकर रहो|

धर्म

आप मुझे मेरे धर्म के बारे में या मैं अपने जीवन में क्या स्वीकार करूँ ये कैसे बता सकते हैं? प्रत्येक व्यक्ति का अपना धर्म होता है, आप कौन होते हैं मुझे मेरे जीवन के बारे में बताने वाले?

मान्यताएं

मनुष्य वही विश्वास करना चाहता है जो उसके अनुकूल और सुविधाजनक हो|

धर्म

बहुत से लोग ये स्वीकार नहीं करते कि जिस पर वो विश्वास करते हैं वो धर्म है, यह अपराध बोध से ग्रस्त मनोदशा का लक्षण है क्यों कि उन्हें पता है कि धर्म चालाकी से भ्रमित और वश में करता है परन्तु यदि आप उसका नाम बदल कर "जीवन शैली" कहने लग जाएँ तो भी कुछ बदलता नहीं है|

धर्म

धर्म सिखाता है कि आप कभी भी सम्पूर्ण सुखी नहीं हो सकते क्यों कि निर्भय और सुखी व्यक्ति को वश में करना मुश्किल होता है, धर्म के चक्कर में न पड़ने का ये एक सशक्त कारण है क्यों कि आप सुखी और निर्भय रहना चाहते हैं|

धर्मग्रन्थ

आखिर क्यों पवित्र धर्मग्रन्थ हिंसा और खून से सने पड़े हैं?

ईश्वर

यदि परमात्मा समर्थ और सर्वशक्तिमान है तो उसने अहिंसक समाधान क्यों नहीं खोजा? आखिर फिर उसे मारकाट करने की जरूरत क्यों? आखिर फिर क्यों नहीं उन्होंने अपने एक इशारे से इस धरती पर शांति की स्थापना कर दी?

धर्मग्रन्थ

पवित्र धर्मग्रंथों को निचोड़ कर देखो तो उनमें से खून टपकेगा|

धर्म

धर्म आपको उस अपराध के लिए ग्लानि में रहना सिखाता है जो न तो आपने किया है और न ही जिस पर आपका कोई वश था|

धर्म

धर्म लोगों को सदा ही पापी व अपराध बोध से ग्रस्त रखना चाहता है, तभी धर्म कहता है कि आप कभी भी सम्पूर्ण सुखी नहीं हो सकते तथा अत्यधिक सुख से दुःख की उत्पत्ति होती है|

धर्म

अवर्णनीय का वर्णन करने के लिए धर्म की उत्पत्ति हुई|

धर्म

अपराध और धर्म - इतने पास पास क्यों हैं?

धर्म

कुछ लोग पेशेवर अपराधी हैं और साथ ही धार्मिक भी हैं तथा कुछ लोग पेशे से तो धार्मिक हैं और साथ ही अपराधी भी हैं|

धर्म

हर धार्मिक व्यक्ति अपराधी नहीं होता परन्तु अधिकतर अपराधी धार्मिक होते हैं|

धर्म

धर्म आपको पीड़ित बनाए रखना चाहता है, दमन और शोषण भयभीत व्यक्ति के ऊपर ढंग से काम करते हैं, भय से उत्पन्न धर्म आपको भय में ही रखना चाहता है|

ईश्वर

मैं नास्तिकों के इस विचार से पूर्णतः सहमत हूँ कि "ईश्वर मात्र एक विचार है" परन्तु समझ नहीं आता कि भला हर्जा क्या है किसी अच्छे विचार को रखने में?

धर्म

धर्म की उत्पत्ति भय से हुई और आज भी भय ही धर्म की कमाई का साधन है|

क्षमा

क्षमा करके आप किसी को सीखने और सुधार करने की संभावना प्रदान करते हैं|

सम्बन्ध

संबन्धों को तोड़ने से शायद ही किसी को कोई उपलब्धि हुई हो, अधिकतर तो नुक्सान ही होता है|

मित्र

ग्राहकों और मित्रों में सबसे बड़ा अंतर ये होता है कि ग्राहक आपसे चाहते हैं और मित्र आपको चाहते हैं|

आत्मविश्वास

जो गलत है वो गलत है, यदि आप कुछ गलत देखें तो उसके विरोध में अपनी आवाज बुलंद करें, अपने प्रियजनों को सतर्क करें और ये स्पष्ट कर दें कि आप इसके खिलाफ हैं|

धर्म

धर्म में बुद्धि का प्रयोग करने की इज़ाज़त केवल एक दायरे में रह कर ही है, उसके बाहर जाकर आप बुद्धि का प्रयोग नहीं कर सकते| विश्वास करें और उसी सीमा में बुद्धि का प्रयोग करें, यदि आप विश्वास नहीं करते हैं तो आप धार्मिक नहीं है|

सत्य

यदि आप सत्य पर विश्वास करें तो कभी अकेले नहीं पड़ेंगे|

नकारात्मकता

पाप (नकारात्मक प्रवृत्ति) पीठ पर रहता है, इसीलिये दूसरे का तो दिखता है परन्तु अपना नहीं| स्वयं की नकारात्मक प्रवृत्तियों को देखें और उन्हें कम करने का प्रयास करें|

धर्मग्रन्थ

धार्मिक लोगों के साथ चर्चा में सबसे बड़ी समस्या ये है कि वो न केवल अपने धर्म और विश्वास को श्रेष्ठ समझते हैं, बल्कि जब वो अपने तर्कों को प्रमाणित करने के लिये धर्मग्रंथों के उद्धरण देते हैं, तो वो ये स्वीकार नहीं कर पाते और भ्रमित हो जाते हैं कि सामने वाला उनके उद्धरणों और धर्मग्रंथों को अंतिम सत्य मानता ही नहीं है|

प्रेम

जहाँ प्रेम होता है वहां गलतियाँ नहीं देखी जातीं|

अहंकार

अहंकार अलगाव का प्रमुख कारण है|

निर्णय

कई बार परिणाम हमारे वश में नहीं होता, अतः ये सोच विचार न करें कि ऐसा नहीं वैसा किया होता तो क्या होता|

निर्णय

यदि आप ईमानदार थे और आपके इरादे अच्छे थे तो कभी अपने निर्णय तथा उसके परिणाम पर पछतावा न करें|

बच्चे

बच्चों को मारने पीटने से उनके अन्दर क्रोध बढ़ता है और ये विचार उत्पन्न होता है कि आज मैं छोटा हूँ और तुम बड़े हो जरा मुझे भी बड़ा होने दो फिर बताऊंगा|

बच्चे

उस दुकान से सामान न खरीदें जहाँ बच्चों को काम करता देखें, दुकानदार को बतायें कि हम इसीलिये तुम्हारी दुकान से खरीदारी नहीं करते क्यों कि तुमने बच्चे को नौकरी पर रखा है|

प्रसन्नता

यदि आप अपने कर्म से प्रेम करें तो जीवन का अधिकतर समय प्रसन्नता से बीतेगा|

आध्यात्मिक

आध्यात्मिकता नितान्त व्यक्तिगत विषय है न कि संस्थागत, बिना मन्दिर और चर्च जाये भी आप आध्यात्मिक हैं यदि आप प्रेम में विश्वास करते हैं|

धर्म

धर्म की न तो कोई उपयोगिता रह गई है और न ही इसका कोई भविष्य है, युवावर्ग ने इसे अस्वीकार कर दिया है और धीरे धीरे ये अपने अंत की ओर बढ़ रहा है|

गुरु

आखिर भारत में साधू सन्यासियों और गुरुओं के पास बेशुमार संपत्ति क्यों है? जबकि एक साधारण आदमी को पेट भरना भी मुश्किल है|

धर्म

धर्म ने सामाजिक संरचना बनाई और परिणाम स्वरुप अछूत जाति का अभिशाप दिया|

धर्म

धर्म लोगों को मूर्ख बनाकर सवाल पूछने से रोकता है जिससे कि लोग अंधविश्वास करके शास्त्रों में जो लिखा है और गुरुओं ने बताया है उसी को मानें|

प्रसन्नता

पता नहीं क्यों बहुत से लोग ये सोचते हैं कि उन्हें प्रसन्न रहने का अधिकार नहीं है|

यौन क्रिया

स्वस्थ शरीर और मन में कामुकता स्वाभाविक है, यदि ऐसा न हो तो इसका मतलब सब कुछ ठीक नहीं है|

विश्वास

प्रेम के दीपक को जलाये रखने के लिये विश्वास का तेल आवश्यक है|

ईश्वर

भगवान किसी धर्म विशेष की निश्चित आकृतियों में बंधा हुआ नहीं है, वो तो प्रेम स्वरूप है और हमारे दिलों में रहता है| यदि आप अपनी प्रार्थना में राम, जीसस या अल्लाह का नाम लेते हैं तो इसका मतलब ये नहीं है कि आप किसी धर्म विशेष का पालन कर रहे हैं, भगवान तो आपके दिल में है कोई फर्क नहीं पड़ता कि आप कौन सा नाम अपनी जबान से लें|

ईश्वर

आप भगवान से मोलभाव नहीं कर सकते कि बड़ी कामना की पूर्ति के लिये बड़ा चढ़ावा और छोटी इक्षा के लिये कुछ सिक्के! दान तो आप मन्दिर में देते हैं भगवान को नहीं, और भगवान को आपके पैसे से कोई मतलब नहीं है|

ईश्वर

यदि आपको परमात्मा से संपर्क बनाना है तो बीच में किसी दलाल की क्या आवश्यकता है? प्रेम के द्वारा सीधा संपर्क करिये|

ईश्वर

मनुष्य की इक्षाओं ने परमात्मा को बनाया और उससे ये इक्षा रखी कि आप इस संसार के कर्ता बन जाओ|

ईश्वर

यदि आप परमात्मा की आकांक्षा रखते हैं तो उसका अस्तित्व अवश्य है, असल में हमारी इक्षाओं ने परमात्मा को बनाया है|

ईश्वर

झगड़ा क्यों करते हो भाई! अगर आपको परमात्मा की जरूरत है तो उसका अस्तित्व आपके लिये है, और अगर आपको उसकी जरूरत नहीं है तो उसका अस्तित्व आपके लिये नहीं है|

ईश्वर

परमात्मा हिन्दू, ईसाई, यहूदी, मुस्लिम या बौद्ध नहीं है| उसका कोई निश्चित रंग रूप और आकार भी नहीं है| एक ही परमात्मा जो आपके दिल में है वही मेरे दिल में भी है और अगर सभी धर्म समाप्त हो जाएँ तब भी वो रहेगा|

ईश्वर

क्या भगवान अपराधियों से रिश्वत लेते हैं?

यौन क्रिया

जब किसी लड़की के साथ बलात्कार होता है तो ये क्यों कहा जाता है कि उसकी इज्ज़त लुट गई? होना तो इसके उलट चाहिये, इज्ज़त तो असल में उसकी गई जिसने ये जघन्य अपराध किया|

क्रियापद्धति

क्या एक माँ अपने बच्चे को याद करने के लिये माला लेकर बैठती है? क्या एक पत्नी को अपने पति के ध्यान स्मरण के लिये नहा धोकर आसन पर आँखें बंद करके बैठना पड़ता है? यदि प्रेम हो तो याद अथवा ध्यान करने नहीं पड़ते बल्कि स्वयं होते हैं| प्रेम स्वरुप परमात्मा कोई पूजापाठ, कर्मकाण्ड और चढ़ावे से नहीं बल्कि प्रेम से मिलता है|

जिम्मेदारी

पुनर्जन्म में विश्वास करने वाले लोगों के पास अपनी जिम्मेदारियों से बचने का ये सबसे अच्छा बहाना होता है कि ये तो पिछले जन्मों के कर्मों का परिणाम है|

आदर

आप किसी को इज्ज़त तभी दे सकते हैं जब कि आप स्वयं की इज्ज़त करते हों यदि कोई आपकी बेइज़्ज़ती करता है तो इसका मतलब वो स्वयं की इज्ज़त भी नहीं करता| असल में उनको इज्ज़त का मतलब ही नहीं पता, न स्वयं के लिये और न ही दूसरों के लिये|

धर्म

धर्म का जहरीला प्रभाव अक्सर देखने में आता है| इसी धर्म के कारण न जाने कितनी ही हत्याएं हुईं, इंसानों को ऊँच नीच में बांटकर उनके बीच नफरत फैलाई| यदि ईश्वर की सत्ता मानते हो तो, इन्सान को भगवान ने बनाया और इन्सान ने धर्म को बनाया और भगवान ने मनुष्य को धर्म के साथ नहीं बनाया था, पैदा तो हम सब एक जैसे ही हुए थे|

धर्म

आशीर्वाद कोई मन्दिरों और गुरुओं को चढ़ावा या दान देने से नहीं मिलता| आप किस्मत और अच्छा भविष्य बाजार में बिकने वाले चावल की तरह नहीं खरीद सकते, ये तो आपको स्वयं बनाना पड़ेगा|

धर्म

मन्दिर जाने या बहुत पूजा पाठ करने से ही कोई धार्मिक नहीं बन जाता| सच्चा धर्म तो वो है जब आपके दिल में प्रेम और करुणा हो तथा परोपकार की केवल भावना ही न हो बल्कि अपनी इस भावना को पूरा करने का सार्थक प्रयास भी हो|

धर्म

भगवान तो दिलों में रहते हैं और जहाँ बुलाओ आ जाते हैं, मन्दिर और मठ तो धर्म के व्यापार का वो केंद्र हैं जहाँ धार्मिक व्यक्ति की श्रद्धा का दोहन होता है चढ़ावे, दान और यहाँ तक कि टिकट के रूप में| जितना जादा पैसा होगा मन्दिर के भगवान उतनी जल्दी दर्शन देंगे और उसी हिसाब से प्रसाद और आशीर्वाद भी मिलेगा|

धर्म

पुनर्जन्म की अवधारना आपको भूत या भविष्य काल में रहने को बाध्य करती है|

धर्म

अधिकतर लोग मन्दिरों और गुरुओं को धार्मिक दान देना पसन्द करते हैं, न कि किसी परोपकारी परियोजना में, क्यों कि उनको स्वर्ग में अपनी सीट सुरक्षित करानी होती है|

धर्म

धार्मिक चोला पहन लेने और मेकअप कर लेने से कोई व्यक्ति अलौकिक या दिव्य नहीं हो जाता|

धर्म

जातिप्रथा धर्म का एक हिस्सा है और धर्म से ही उत्पन्न हुई है| जिस धर्म की आप प्रशंसा और पालन करते हैं, वही इंसान को ऊँच और नीच में बांटता है|

धर्म

धर्म अमीरों का मनोरंजन है परन्तु गरीबों के लिए जरूरी नहीं| आपको कर्मकाण्ड करना है, मन्दिर जाना है, दान देना है और इन सबमें पैसा खर्च होता है| साधन संपन्न ही धर्म के बारे में सोचते हैं, गरीब को तो पहले रोटी की फ़िक्र होती है|

धर्म

धार्मिक प्रवचन और उपदेश एक प्रदर्शन या कला है न कि कोई अलौकिक या दिव्य कर्म|

धर्म

बुरा काम करने पर भी बुरा महसूस न हो इसके लिये लोग धर्म का सहारा लेते हैं|

धर्म

धार्मिक भ्रष्टाचार सबसे जादा बुरा है, क्यों कि भ्रष्टतम लोग स्वयं को आदर्श और पवित्र दिखाते हैं और अपने अनुयायी भी बनाते हैं|

सम्बन्ध

रिश्ते बना लेना आसान है और रिश्तों को तोड़ देना भी आसान है, परन्तु निभाने के लिये समर्पण, प्रेम और विश्वास जरूरी है|

झूठ

अधिकतर लोग झूठ किसी को नुक्सान पहुँचाने के लिए नहीं बल्कि स्वयं के विचारों या भावों को छुपाने के लिये बोलते हैं, ये एक सबसे बड़ी समस्या है, जिसका नाम है "आत्मविश्वास की कमी"

प्रसन्नता

आपके पास वो सब कुछ है जो आपको चाहिये, प्रसन्न होने के सभी कारण मौजूद हैं, खुश रहें और स्वयं से प्रेम करें|

प्रसन्नता

आप वही किसी दूसरे को दे सकते हैं जो स्वयं के पास हो| अब वो चाहे बात पैसे की हो या प्रेम की या फिर खुशी की| ये भी कोई फर्क नहीं पड़ता कि किसको देना चाहते हैं| रिश्तेदार को, पड़ौसी को या देश को, आप वही दे सकते हैं जो कि आपके पास होगा| जो वस्तु आपके पास है ही नहीं आखिर वो आप किसी को कैसे देंगे| यदि आप स्वयं सुखी नहीं हैं तो भला किसी को कैसे सुखी कर पायेंगे? अतः प्रसन्न रहें और स्वयम से प्रेम करें|

प्रसन्नता

यदि आपका छोटा सा प्रयास या दो शब्द किसी को प्रसन्न कर सकते हैं तो उसमें कंजूसी न करें|

ग्लानि

हम मनुष्य हैं और गलतियाँ स्वाभाविक हैं| गलतियाँ करने वाला गलत नहीं बल्कि अहंकार के वशीभूत होकर उनको स्वीकार न करने वाला होता है| गलतियों की वजह से ग्लानि न करें और ग्लानि से बचने के लिये उन्हें स्वीकार कर लें|

मित्र

संभवतः आपके विचार नहीं मिलते और आप हजारों मुद्दों पर एकदूसरे से असहमत हैं, परन्तु फिर भी मित्रता संभव है यदि आप एकदूसरे पर विश्वास और प्रेम करते हैं|

मित्र

दोस्ती जितनी पुरानी होती जाती है उतनी ही खूबसूरत होती जाती है, दोस्ती को जिन्दा रखें और उसकी गहराई का आनंद लें|

क्षमा

जब आप किसी गलती पर स्वयं को माफ़ कर देते हैं तो भला उसी गलती पर दूसरे को क्यों नहीं? क्षमा करना सीखें, आपको संतुष्टि और शांति मिलेगी|

भोजन

कम से कम दिन में एक बार पूरे परिवार के साथ मिलकर भोजन करें, आपसी प्रेम बढ़ेगा|

अनुयायी

लाखों अनुयायी होना किसी के सही होने की गारंटी नहीं हैं| हिटलर के भी लाखों अनुयायी थे परन्तु आप उसे सही नहीं ठहरा सकते|

भावनाएँ

काश भावनाओं के सम्पूर्ण सम्प्रेषण का कोई और रास्ता होता क्यों कि वाणी के रूप में अनुवाद करने पर तो मूल्य क्षरण हो ही जाता है|

भावनाएँ

बहुत से लोगों के लिए ये व्यक्त करना मुश्किल होता है कि वो क्या महसूस कर रहे है| कई बार तो उन्हें ये भी पता नहीं होता कि ये उन्हें पसन्द है या नापसन्द, तब वो बाजू वाले की तरफ देखते है कि उसकी क्या प्रतिक्रिया है क्यों कि उसकी हाँ में हाँ मिलाना उनके लिये ज्यादा आसान है|

अहंकार

अहंकार में अँधा व्यक्ति सत्य नहीं देख पता जिससे कि उसकी निर्णय क्षमता भी प्रभावित होती है|

ज्ञान

विद्वता इसमें नहीं कि आप किसी साधारण सी बात को शब्दों के आडम्बर से जटिल बना दें वरन इसमें है कि कठिन से कठिन बात को भी सरल से सरल शब्दों में प्रस्तुत करें|

प्रसन्नता

जब आप किसी को देकर प्रसन्न होते है वही वैराग्य है|

प्रसन्नता

कृपया दूसरों को प्रसन्न रखने के कोशिश में अपनी प्रसन्नता न खोएं | सबको सदा ही प्रसन्न रखना तो जैसे असंभव ही है | सबका अपना अपना अहम् होता है और जब वो टकराता है तो चाहे कुछ भी कर लो सबको प्रसन्न नहीं रख सकते | अतः पहले स्वयं को प्रसन्न रखने का प्रयास करें तभी आप दूसरों को भी प्रसन्न रख पाएंगे|

प्रसन्नता

महत्वपूर्ण ये नहीं है कि आपके पास पैसा कितना है बल्कि ये है कि आप प्रसन्न कितने है|
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